'बैंकिंग प्रणाली सुधारें विकसित देश'

वाशिंगटन में आयोजित विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीए मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की एक बैठक में कहा गया कि दुनियाभर में पैदा हुए आर्थिक संकट से उबरने के लिए इन उपायों की ज़रूरत है.
आईएमएफ़ प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में प्रयास तो शुरू हो चुके हैं पर उनकी रफ़्तार बहुत धीमी है.
बैठक के दौरान अफ़्रीकी देशों को वैश्विक आर्थिक संकट के चलते और अधिक मदद देने की बात भी उठी.
आईएमएफ़ के प्रबंध निदेशक डॉमिनिक कॉन ने कहा कि इस बैठक में सभी ने एकजुटता से बैंकिंग प्रणाली में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सभी इस बात पर दोबारा सहमत हैं कि हमें ये क़दम तत्काल उठाने की ज़रूरत है क्योंकि आर्थिक सुधार पूरी तरह से इसी पर आधारित होंगे."
कॉन ने कहा कि इस बैठक में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधि इन सुधारों की प्रक्रिया को तेज़ करने के इरादे के साथ अपने देश वापस जाएँगे.
सुधार के लिए
बीबीसी के एंड्र्यु वॉकर का आकलन है कि कॉन अपने बयान से यह संकेत भी देना चाह रहे हैं कि अगर उन्हें बैंकों की ज़िम्मेदारी तय होती या ये सुधार होने नहीं दिखेंगे तो वो इसके लिए आवाज़ भी उठा सकते हैं.
पर कॉन का बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीकी वित्तमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि आईएमएफ़ में कुछ बदलाव लाने की ज़रूरत है और विकसित होकर आगे आ रही अर्थव्यवस्थाओं को इसमें अधिक भागीदारी देनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने चीन का उदाहरण दिया.
विश्लेषक मानते हैं कि ऐसा हुआ तो चीन आईएमएफ़ में और अधिक पैसे डालेगा.
उधर विश्व बैंक ने ग़रीब देशों के लिए 55 अरब डॉलर के विशेष आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा कर दी है.


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