फिलहाल पीएम नहीं बनूंगा: राहुल गांधी

पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे पर आए राहुल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कई अन्य मु़द्दों पर पत्रकारों के साथ खुल कर बातचीत की। वामदलों के साथ गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं सोचता हूं कि चुनाव परिणाम आने के बाद ही वामपंथियों के साथ गठबंधन के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। चुनाव परिणाम आने से पहले इस संबंध में कोई भी चर्चा काल्पनिक होगी।"
कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं किसी के लिए दरवाजा खुला रखने वाला कोई नहीं होता। पार्टी में वरिष्ठ नेता हैं। यह तो पार्टी की एक सामान्य परंपरा है कि इच्छुक लोगों के लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात के बयान पर पूछे गए सवाल को टालते हुए राहुल ने कहा, "कोई भी व्यक्ति इन काल्पनिक सवालों को लंबे समय तक खींच सकता है, लेकिन जहां तक मेरा सवाल है तो मैं कहूंगा कि पहले चुनाव खत्म हो जाने दीजिए, परिणाम आ जाने दीजिए उसके बाद देखेंगे क्या परिदृश्य उभरता है।"
करात ने कहा था कि तीसरे मोर्चे की सरकार को कांग्रेस के बाहरी समर्थन से एतराज नहीं होगा, लेकिन वाम दल कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।
बोफोर्स सौदे के आरोप गलत
बोफोर्स तोप सौदे में उनके परिवार पर लगाए जाने वाले आरोपों को झूठा करार देते हुए राहुल ने कहा कि इस मामले में माफी मांगने का कोई कारण नहीं बनता। सामान्य तौर पर काफी संयमित रहने वाले राहुल एक महिला पत्रकार के सवाल पर अपना संयम खो बैठे। उन्होंने कहा कि बोफोर्स मामले में गैर कांग्रेसी सरकारों ने उनके परिवार पर झूठे आरोप लगाए थे।
पत्रकार ने उनसे पूछा था कि उनका परिवार बोफोर्स तोप सौदे और सिख विरोधी दंगों के मामले में लगाए गए आरोपों के ढेर पर बैठा हुआ है। पत्रकार ने पूछा कि क्या वह 1980 के दशक में चर्चित बोफोर्स तोप घोटाले के मामले में माफी मांगेंगे तो राहुल ने कहा, "मैं आपके द्वारा प्रयोग किए गए शब्द से सहमत नहीं हूं।"
उन्होंने कहा, "इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए मुझे माफी मांगनी चाहिए। यह बिल्कुल झूठा मामला है। पिछले 20 वर्षो से विपक्षी सरकारें इस झूठ को इस्तेमाल कर रही हैं।"
पार्टी में बदलाव ला रहे राहुल
राहुल ने यह भी साफ किया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई तो वह उसे ठुकरा देंगे, क्योंकि वह पार्टी में बदलाव लाने में व्यस्त हैं। वैसे भी इस सर्वोच्च पद के लिए उनमें अभी अनुभव की कमी है।
राहुल ने कहा, "मैं दो कारणों से इंकार करूंगा। पहला यह कि मैं कांग्रेस पार्टी के संगठन स्तर पर काम कर रहा हूं। यह जरूरी है कि गरीबोन्मुखी युवा कांग्रेस का संगठन विकसित हो। दूसरा, मैं नहीं समझता कि मुझमें फिलहाल देश का प्रधानमंत्री बनने की योग्यता है। मेरे पिता की बात और थी।"
ज्ञात हो कि राहुल युवक कांग्रेस के प्रभारी भी हैं। उनके पिता राजीव गांधी 1984 में 40 साल के थे, जब उनकी माता एवं देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें देश की कमान संभालनी पड़ी थी। राहुल जून में 39 साल के हो जाएंगे।
यह पूछने पर कि क्या राजनीति में उनके होने से कांग्रेस के वंशवादी होने की बात पुख्ता होगी, राहुल ने कहा, "मनमोहन सिंह गांधी परिवार के नहीं हैं और वह प्रधानमंत्री हैं।" राहुल ने कहा, "आप मुझे गांधी के रूप में देखते हैं। मैं उसे बदल नहीं सकता। मैं गांधी परिवार से हूं। वे मेरे माता-पिता और दादा-दादी हैं।"
नहीं तोड़ा सुरक्षा घेरा
दूसरी ओर राहुल ने इस बात से भी इंकार किया कि शुक्रवार को उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में एक चुनावी सभा के दौरान अपना सुरक्षा घेरा तोड़ दिया था।
राहुल ने संवाददाताओं से कहा, "मैने अपना सुरक्षा घेरा नहीं तोड़ा। मैंने ऐसा अपने सुरक्षाकर्मियों से बातचीत के बाद किया था। उन्होंने मुझे इसके लिए मंजूरी दी थी। मैं लोगों से मिलना पसंद करता हूं और लोगों से मिलना सिर्फ एक या दो जगहों के लिए तय होता है। इस मामले को वे (कमांडो और एसपीजी) ही तय करते हैं।"
पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या उनकी बहन प्रियंका ऐसे मामलों में उन्हें डांटती हैं, तो राहुल ने कहा, "मेरी बहन बहुत सारी चीजों के लिए मुझे डांटती है और मैं भी उसे डांटता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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