प्रधानमंत्री पर जूता फेंकने की कोशिश, मनमोहन ने हमलावर को माफ किया (राउंडअप)

लेकिन जूता फेंकने की चल पड़ी प्रवृत्ति की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी निंदा की है। यह परंपरा उस समय शुरू हुई, जब पिछले दिसंबर महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर इराक में एक पत्रकार ने जूता फेंका था।

प्रधानमंत्री ने जूता फेंके जाने की घटना के कारण क्षण भर के लिए अपना भाषण रोका लेकिन तब तक विशेष सुरक्षा दस्ते (एसपीजी) का एक सदस्य तत्काल जूते के पास पहुंच गया। जूता मंच से करीब 20 मीटर दूर गिरा था।

सुरक्षा बलों ने जूता फेंकने वाले को तत्काल हिरासत में ले लिया। जूता फेंकने की कोशिश करने वाले शख्स की पहचान हितेश चौहान (20 वर्ष) के रूप की गई है और वह एक कंप्यूटर इंजीनियर है।

पुलिस ने कहा कि हितेश चौहान प्रेस दीर्घा के समीप पहली कतार में बैठा था।

इस घटना के तत्काल बाद कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने के लिए कहा।

कांग्रेस प्रवक्ता एम. वीरप्पा मोइली ने कहा, "यह पूरी तरह स्तब्ध कर देने वाली घटना है। प्रधानमंत्री के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके लिए मोदी को खेद प्रकट करना चाहिए।"

मोइली ने कहा कि यह घटना गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की घृणित राजनीति का परिणाम है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ था तो उन्होंने कहा, "यह जांच का विषय है। लेकिन इससे राज्य में कानून व व्यवस्था की खराब स्थिति का पता तो चलता ही है।"

हालांकि प्रधानमंत्री पर जूता फेंके जाने की कोशिश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी निंदा की है।

भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने सीएनएन-आईबीएन समाचार चैनल से कहा, "हम इस घटना की निंदा करते हैं। यह किसी लोकतांत्रिक अभियान का हिस्सा नहीं है। हमने गृह मंत्री पी. चिदंबरम के साथ घटी घटना की भी निंदा की है और हम प्रधानमंत्री के साथ घटी घटना की भी निंदा करते हैं।"

रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि पुलिस इस मामले में समुचित कार्रवाई करेगी।"

दूसरी ओर कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को तवज्जो नहीं दी जाना चाहिए।

घटना के बाद अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चौहान ने बताया है कि वह किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं है। लेकिन उसके विरोध का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

घटना के समय प्रधानमंत्री के साथ मंच पर गुजरात के नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

जूता फेंकने के बाद कोई हंगामा नहीं हुआ और सभा में मौजूद लोगों ने प्रधानमंत्री का भाषण शांतिपूर्वक सुना।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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