मैं नाम का नहीं काम का गांधी हूं : वरुण गांधी (लीड -1 )
फतेहपुर के खागा में भाजपा उम्मीदवार राधेश्याम गुप्ता के समर्थन में एक चुनावी रैली में वरुण गांधी ने कहा, "मैं अगले तीन साल तक प्रदेश में जी तोड़ मेहनत करूंगा। हवा-हवाई तरीके से काम न करके मैं प्रदेश की हर तहसील, हर गांव में जाऊंगा और राष्ट्रवादियों, गरीबों और किसानों के लिए काम करूंगा। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि हर राष्ट्रवादी को सम्मान मिले, हर गरीब को स्वास्थ्य सेवाएं मिले और हर गरीब के बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले।"
वरुण ने कहा कि लोग उन्हें नाम के गांधी के रूप में नहीं बल्कि काम के गांधी के तौर पर जानें। उन्होंने जोर दिया कि वह नाम के गांधी नहीं बल्कि काम के गांधी है और वह कभी अपने परिवार का नाम नहीं भुनाएंगे।
भाजपा के युवा नेता ने जोर देकर कहा कि वह उत्तर प्रदेश में फिर से राष्ट्रवाद को जिंदा करेंगे। इसके लिए उन्हें चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में राष्ट्रवादियों के हाथ में राज्य की सत्ता होगी।
राज्य की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का नाम लिए बगैर उस पर निशाना साधते हुए उन्होंने लोगों से कहा कि प्रदेश के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण समय है और आप लोग जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद और विकास की बात करने वाले को अपना वोट दें।
वरुण ने आरोप लगाया कि उन्हें जेल में एकांत में रखा गया। उस दौरान पीपल का एक पेड़ ही उनका मित्र था। वरुण ने जेल की यादें ताजा करते हुए कहा कि वह फतेहपुर इसलिए आए क्योंकि जेल में एक कर्मचारी जिसका नाम सुरेश कुमार था, जो शायद यहीं का रहने वाला था। उसने उनसे कहा कि जेल से निकलने के बाद वह प्रचार करने फतेहपुर जरूर जाएं। जब वरुण ने इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि राजनीतिक दलों में उसका भरोसा नहीं है लेकिन व्यक्तियों में उसका विश्वास है।
वरुण ने लोगों से घर से निकल भारी संख्या में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि यह मेरी अकेले की लड़ाई नहीं है। यह लड़ाई देश को शक्तिशाली बनाने की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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