संयुक्त राष्ट्र दूत ने लिट्टे से नागरिकों को मुक्त करने को कहा (लीड-3)

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत मामलों के प्रमुख जान होम्स ने युद्ध क्षेत्र में फंसे हजारों लोगों को बिना किसी नुकसान के बाहर निकालने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि महीनों की लड़ाई में युद्ध क्षेत्र में फंसी नागरिक आबादी ने भारी कीमत चुकाई है।

होम्स के हवाले से जारी बयान में कहा गया है कि लिट्टे को नागरिकों को तुरंत रिहा करने के साथ ही हथियार डाल देना चाहिए। सरकार को भी अधिकतम संयम बरतते हुए भारी हथियारों के प्रयोग से बचना चाहिए।

शनिवार को कोलंबो पहुंचे होम्स दो दिवसीय यात्रा में सरकार के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों और दानदाताओं से मुलाकात करेंगे।

उधर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के खिलाफ अपनी लगातार विजयों से उत्साहित श्रीलंका सरकार ने युद्ध विराम के लिए किसी भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने से इंकार किया है। विद्रोहियों के पूरी तरह सफाए और नागरिकों को मुक्त कराने तक सैनिक कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकारी अखबार 'संडे आब्जर्रवर' ने देश के शक्तिशाली रक्षा सचिव गोटाबाए राजपक्षे के हवाले से कहा कि प्रभाकरन के पकड़े जाने और सेना के पूरी भूमि पर कब्जा करने तक सैनिक कार्रवाई जारी रहेगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 58वीं डिविजन के जवानों ने मुल्लइतिवु जिले में 'नो फायर जोन' में स्थित लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के कब्जे वाले तटीय गांव वालायारमदाम पर अधिकार कर लिया है।

बयान के अनुसार सैनिकों ने इस गांव पर रविवार सुबह अधिकार किया और 500 लोगों को सुरक्षित बचाया। वालायारमदाम लिट्टे के अंतिम ठिकाने वेलामुल्लिवइक्कल से केवल छह किलोमीटर दूर है।

सोमवार से अब तक 110,000 लोग युद्ध क्षेत्र से सरकार के नियंत्रण वाले इलाके में आ चुके हैं। इससे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की कुल संख्या 180,000 हो चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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