श्रीलंका में मक्खियों की तरह मर रहे हैं तमिल : भुक्तभोगी
एम़ आर. नारायणस्वामी
नई दिल्ली, 25 अप्रैल(आईएएनएस)। श्रीलंका के युद्घ क्षेत्र से तमिल महिलाओं और बच्चों के भागने की जद्दोजहद ने एक सहायताकर्मी को हॉरर फिल्म के भयावह नजारों की याद दिला दी। श्रीलंकाई सेना और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमि ईलम (लिट्टे) के बीच खूनी संघर्ष में किसी तरह अपनी जान बचाने वाले लोगों का कहना है कि श्रीलंका में तमिल नागरिक मक्खियों की मौत मर रहे हैं।
युद्घ क्षेत्र से लंबे समय तक फंसे लोगों में से कई तो चलता-फिरता कंकाल बनकर रह गए हैं। भुखमरी और मौत के साये में महीनों गुजारने वाले इन लोगों की पतली सूखी त्वचा के नीचे हड्डियां साफ दिखती हैं। कई लोगों को ऐसी उपेक्षित मौत मिली जैसे वे इंसान नहीं मक्खी थे। तार-तार हो गए उनके कपड़ों पर खून के दाग लगे हैं।
कई लोग तो इतने कमजोर हो गए है कि अपने बूते खड़े भी नहीं हो सकते। भुक्तभोगियों में से कई से आईएएनएस ने संपर्क किया तो उन्होंने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर इस भयावह मंजर से अवगत कराया। उनकी जुबानी तमिलों की घोर पीड़ा और त्रासदी की कहानी है। कई लोग तो इतने कमजोर हो गए हैं कि कुछ बोलने की हालत में नहीं हैं।
इनका कहना है कि युद्घ क्षेत्र में फंसकर कितने लोगों ने अपनी जान गंवाई, इसकी गिनती नहीं है। कई लोग भागते समय ऐसे मारे गए जैसे मौत ही उनकी मंजिल थी। भागते लोगों पर लिट्टे ने गोलियां बरसाई। सेना की जवाबी कार्रवाई से भी लोगों की मुसीबतें बढ़ीं। एक भुक्तभगी ने बताया, "लोगों को बम या बारुदी सुरंगों से उड़ा दिया गया। कई ने अपने हाथ पांव गंवाए। बच्चे मां से बिछड़ गए, वहीं कई महिलाएं अकेली छूट गईं। घायलों के इलाज के लिए कोई नहीं था।" एक सहायताकर्मी कहता है, "यह नजरा हॉरर फिल्म जैसा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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