बिहार में राजग के लिए चुनौतीपूर्ण होगा तीसरा चरण
पिछले लोकसभा चुनाव में इन 11 सीटों में से एक जद (यू) और चार भाजपा के खाते में गई थीं। तीसरे चरण में जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव मधेपुरा से किस्मत आजमाएंगे। इसके साथ ही भाजपा के मौजूदा तीन सांसद भी चुनावी मैदान में होंगे।
जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह बेगूसराय सीट छोड़कर मुंगेर से चुनावी मैदान में हैं तो बेगूसराय में पार्टी ने पूर्व मंत्री मोनाजिर हसन को टिकट दिया है। नीतीश सरकार के दो मंत्री दामोदर रावत की बांका में और दिनेशचन्द्र यादव की खगड़िया में प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मुस्लिम बहुल किशनगंज सीट पर राजग ने महमूद अशरफ को प्रत्याशी बनाया है। बांका में पार्टी से विद्रोह कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह के कारण भी मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर है।
कोसी त्रासदी के बाद सत्तारूढ़ राजग के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी चुनाव चुनौतीपूर्ण है। सुपौल में कांग्रेस ने बाहुबली पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन को प्रत्याशी बनाया है तो पूर्णिया में पप्पू की मां और निर्दलीय उम्मीदवार शांतिप्रिया देवी को समर्थन देकर राजग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जद (यू) ने पूर्व मंत्री विश्वमोहन कुमार को सुपौल से प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा पिछले चुनाव में शिकस्त खा चुके जद (यू) के शरद यादव मधेपुरा से और भाजपा विधायक प्रदीप सिंह अररिया से चुनावी मैदान में हैं।
इसके अलावा भाजपा ने मौजूदा तीन सांसदों निखिल कुमार चौधरी को कटिहार से, उदय सिंह को पूर्णिया से तथा शाहनवाज हुसैन को भागलपुर से पुन: चुनाव मैदान में उतारा है। तीसरे चरण के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अपना चुनावी दौरा कर चुके हैं।
जद (यू) के प्रवक्ता विजय कुमार चौधरी का कहना है कि सभी चरण के चुनाव चुनौतीपूर्ण हैं लेकिन इन 11 सीटों पर राजग के लिए मुश्किल नहीं है। कोशी त्रासदी के बाद यहां के लोगों ने सरकार के काम को सराहा था, जो चुनाव में राजग को मदद करेगा।
राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र किशोर का मानना है कि ये सीटें राजग के लिए चुनौतीपूर्ण होंगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ की त्रासदी के बाद सरकार द्वारा किया गया राहत कार्य भी तीसरे चरण में मतदाताओं की कसौटी पर होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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