भारत की ओर निगाह कर रहे हैं अंग्रेजी प्रकाशक
भले ही अमेरिका और ब्रिटेन अब भी किताबों के बड़े बाजार हैं लेकिन वहां किताबों की बिक्री में उल्लेखनीय कमी आई है। अमेरिका में वर्ष 2008 में 24.3 अरब डॉलर और ब्रिटेन में तीन अरब पाउंड मूल्य कि किताबों की बिक्री हुई लेकिन वर्ष 2007 की तुलना में यह क्रमश: छह और 2.5 फीसदी कम थी।
इसके विपरीत पिछले कुछ वर्षो के दौरान भारत के पुस्तक बाजार में इजाफा हुआ है और यह 10 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है।
यूके ट्रेड एंड इंवेस्टमेंट (यूकेटीएंडआई) के शोधकर्ताओं द्वारा लंदन बुक फेयर में किए गए शोध के मुताबिक पब्लिशर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि वर्ष 2007 में भारत में पुस्तक बाजार लगभग 1.25 अरब मूल्य का था जिसमें आधे से अधिक अंग्रेजी पुस्तकों का था।
पुस्तक मेले के निदेशक एलिएस्टर बर्टेनशॉ ने कहा, "इस समय भारत एक बड़ा बाजार है जहां सभी सेक्टरों में कारोबार की बेहतर गुंजाइश है और इसमें प्रकाशन भी शामिल है।"
एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 35 करोड़ लोग अंग्रजी समझते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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