वाम मोर्चे को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक रूप से जागरूक माने जाने वाले पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का मानना है कि इस बार के चुनाव में वाम मोर्चे की राह आसान नहीं होगी। एक निजी बैंक में अधिकारी के पद पर तैनात तुलसी प्रसाद दत्ता का कहना है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच गठजोड़ से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाला वाम मोचरे दवाब में आ गया है।
दत्ता ने कहा, "कांग्रेस और तृणमूल के हाथ मिलाने से वाम मोर्चा को कडी़ चुनौती मिल रही है और मोर्चे के वरिष्ठ नेता भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।"
दक्षिण कोलकाता में रहने वाले एक अवकाश प्राप्त अधिकारी हरीश गांगुली का कहना है कि वर्षो बाद वाम मोर्चे को कड़ी चुनौती मिल रही है। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता देबू पंत इन बातों से इंकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में माकपा पराजित नहीं होगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में वाम मोर्चे ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी वहीं कांग्रेस ने छह और तृणमूल ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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