ज्ञानेंद्र की कमान वाली सरकार के पतन की तीसरी वर्षगांठ मनी, राजनीतिक टकराव जारी
काठमांडू, 24 अप्रैल(आईएएनएस)। नेपाल में राजनीतिक टकराव, सेना और माओवादियों के बीच तनाव और राजनीतिक अनिश्चिता के माहौल के बीच शुक्रवार को पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र की प्रत्यक्ष कमान वाली सरकार के पतन की तीसरी वर्षगांठ मनाई गई।
24 अप्रैल, 2006 को तत्कालीन नरेश ज्ञानेंद्र को संसद को बहाल कर सरकार की प्रत्यक्ष कमान छोड़ने को बाध्य होना पड़ा था। राजनीतिक पार्टियों के देशव्यापी प्रदर्शन के बाद ज्ञानेंद्र को झुकना पड़ा था। इसके साथ ही नेपाली माओवादियों की चुनावी राजनीति में भागीदारी का रास्ता साफ हो गया था और नेपाल में 239 वर्ष पुरानी राजशाही के पतन की प्रक्रिया तेज हो गई थी।
राजशाही के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली सरकार के पतन के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ने मुख्य अतिथि की हैसियत से भाग लिया। मुख्य समारोह तुंदीखेल में आयोजित हुआ। इस खुशी में राजनीतिक तनाव घुला हुआ है। तीन राजनीतिक पार्टियों के बीच टकराव जारी है।
नेपाली कांग्रेस सेना पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की माओवादी सरकार का विरोध कर रही है। वह इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही में खलल डाल रही है। माओवादी गठबंधन सरकार की एक प्रमुख घटक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट में भी इस मसले पर विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। सेना प्रमुख को पद से हटाने की माओवादी सरकार की कोशिश का इस पार्टी का एक धड़ा पुरजोर विरोध कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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