प्रधानमंत्री न बनने पर राजनीति से सन्यास ले सकते हैं आडवाणी!
आडवाणी ने आउटलुक को दिए एक साक्षात्कार में यह संकेत दिया। यह पूछे जाने पर कि यदि वह प्रधानमंत्री नहीं बन पाए तब पार्टी में उनकी भूमिका क्या रहेगी, आडवाणी ने कहा, "यह तो पार्टी पर निर्भर करता है कि वह मुझसे क्या अपेक्षा रखती है। हालांकि मैंने पहले राजनीति छोड़ने की योजना बनाई थी। नवम्बर 2007 का वह दिन याद है जब अपनी पुस्तक लिखने के दौरान मुझे महसूस हुआ था कि अपने जीवन के 80 बरस पूरे कर लेना पर्याप्त है और अब इसे छोड़ देना चाहिए। यदि ऐसी स्थिति पैदा हुई तो फिर मैं एक निर्णय लूंगा।"
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) यदि सत्ता में आया तो सौ दिनों के भीतर ही स्विस बैंकों में जमा काले धन को देश में लाया जाएगा।
मायावती को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने के सवाल पर उन्होंने कहा, "मुझे किसी तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की कोई संभावना नहीं दिखती। मौजूदा हालात में मुझे ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आती कि कांग्रेस या भाजपा के नेतृत्व के बगैर कोई सरकार बन सकती है।"
उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए विपक्ष की एकजुटता के जवाब में आडवाणी ने कहा, "लोकतंत्र में कोई भी विपक्षी दल यह नहीं चाहता कि उसके विरोधी की सरकार बने।"
उन्होंने कहा, "लोग पूछते हैं कि पार्टी अध्यक्ष के पद पर रहते हुए मैंने प्रधानमंत्री पद के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का प्रस्ताव क्यों रखा तो इसके जवाब में मैं लोगों से यही कहता हूं कि तब मुझे लगा कि वाजपेयी न सिर्फ योग्य और सक्षम नेता हैं बल्कि बहुत बड़े तबके में सर्वमान्य भी हैं।"
आडवाणी ने कहा, "लोग मुझसे कहते हैं कि तब आप भी प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन मैं उन्हें यही कहता हूं कि तब मैंने पार्टी हित में सोचा और मुझे लगा कि इस पद के लिए वाजपेयी से बेहतर और कोई नहीं हो सकता।"
उन्होंने यह भी कहा, "मुझे इस बात का कोई पछतावा नहीं है कि मैं उस समय प्रधानमंत्री नहीं बन पाया। हां, लोग ऐसा मानते हैं कि वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनवाने में मेरा योगदान था। राजनीति में हर व्यक्ति एक दूसरे का प्रतियोगी होता है लेकिन मैंने अपने को कभी प्रतियोगी नहीं माना। अटलजी मुझसे वरिष्ठ भी थे और मैंने उनसे सीखा भी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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