चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र का चुनावी मुद्दा है धरोहरों का संरक्षण
नई दिल्ली, 24 अप्रैल(आईएएनएस)। इन हवेलियों की सुसज्जित दीवारें वक्त की मार झेलते हुए धराशयी हो रही हैं और मुगलिया शानोशौकत की गवाह रही कई धरोहरों पर दुकानदार काबिज हो गए हैं। सरकारी अपेक्षा झेल रहीं इन धरोहरों के संरक्षण को लेकर इस चुनावी फिजा में कुछ लोगों ने आवाज उठा उठाई है। चांदनी चौक की चुनावी जंग में यह भी मुद्दा है।
चांदनी चौक के बल्लीमरान इलाके के रहने वाले 70 वर्षीय अजमल खान कहते हैं, "पुरानी दिल्ली आज अपने गौरवशाली अतीत का साया भर रह गई है। कई नामी हवेलियों की पहचान यहां लुप्त हो गई है। जब तक आपको कोई यह बताए नहीं कि शाहजहां की प्रसिद्घ पत्नी जीनत बेगम की हवेली यह है तब तक आपका ध्यान उधर जाएगा भी नहीं।" खान यहां कबाब बेचते हैं।
खान की दुकान के पास ही घड़ी बेचने वाले रोशन राज गुस्से के स्वर में कहते हैं, "हमारे लिए यह चुनावी मसला है। यहां की विरासत खतरे में है। लोगों की दिलचस्पी यह जानने में रही है कि यहां पाकिस्तान के नेता परवेज मुशर्रफ के बचपन का कुछ हिस्सा बीता है। इसकी ऐतिहासिकता इतनी भर नहीं है। चांदनी चौक तो अपने आप में इतिहास है। हम चाहते हैं कि यहां का सांसद ऐसा व्यक्ति बने जो इन धरोहरों के संरक्षण की महत्ता को समझता है।"
यहां से कांग्रेस के सांसद और उम्मीदवार कपिल सिब्बल कहते हैं, "हम धरोहरों के संरक्षण को लेकर संजीदा हैं। हमने इसके लिए संस्कृति मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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