करुणानिधि और चिदंबरम ने मानवीय संकट के लिए श्रीलंका को लताड़ा
संवाददाताओं को वितरित की गई एक कविता में करुणानिधि ने कहा कि उनका बंद केवल तमिलों की जीत और श्रीलंका में स्थाई संघर्ष विराम हेतु दबाव डालने के लिए है।
विपक्षी दल एआईएडीएमके की नेता जयललिता पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए करुणानिधि ने उन्हें तमिल हितों की कुछ बाधाओं में से एक बताते हुए भारत से श्रीलंका के तमिल अलगाववादियों की मदद करने को कहा।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव गांधी ने तमिल विद्रोहियों को कुछ जंगली और पहाड़ी इलाकों में प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई थी। परंतु श्रीलंका सरकार की बांटो और राज करो की नीति से आपसी संघर्ष शुरू हुआ और तमिल हित नष्ट हो गए।
शिवगंगा संसदीय क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल करने के बाद संवाददाताओं से चर्चा में चिंदबरम ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) और श्रीलंका सरकार दोनों पर भारत के शांति के आग्रह पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके कारण ही श्रीलंका में मानवीय संकट पैदा हुआ।
चिदंबरम ने श्रीलंका सरकार पर आरोप लगाया कि उसने समस्या के मानवीय हल के स्थान पर सैनिक समाधान का रास्ता अपनाया।
उन्होंने कहा कि कोलंबो इस मामले में अधिक दोषी है। उसे समझना चाहिए कि उसकी सेना समस्या का समाधान नहीं कर सकती। श्रीलंका में तमिलों को सम्मान से शांतिपूर्ण जीने और संघीय व्यवस्था में समान अधिकार अनिवार्य रूप से देकर ही न्यायपूर्ण हल हासिल हो सकता है।
श्रीलंका से सभी राजनयिक संबंध तोड़ने की करुणानिधि की मांग और कुछ संगठनों की लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को भारत में राजनीतिक शरण देने की मांग से संबंधित प्रश्न का जवाब देने से चिदंबरम ने इंकार कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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