लेनिन भी झेल रहे हैं मंदी की मार, नया सूट नसीब नहीं!

मास्को, 22 अप्रैल(आईएएनएस)। भलेही अपने करिश्माई नेतृत्व से उन्होंने अपने वतन के गरीबों को आर्थिक मुक्ति का रास्ता दिखाया, पर मंदी के इस माहौल में उनके पार्थिव शरीर को नया सूट तक नसीब नहीं हो रहा है। बात हो रही रूसी क्रांतिकारी व्लादिमीर लेनिन की जिनके पार्थिव शरीर को नई पोशाक भी नसीब नहीं हो रही है।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने टड्र अखबार में छपी एक खबर के हवाले से खबर दी है कि बोल्शेविक क्रांति के इस अग्रदूत को अपने 139 वें जन्मदिन के मौके पर भी अपने निर्जीव शरीर के लिए नई पोशाक मयस्सर नहीं। अखबार लिखता है, "यह स्थिति उस देश की है जो आर्थिक विकास की पटरी पर तेज दौड़ लगाने का दावा करता है। जहां लेनिन कपड़े के लिए तरस रहे हों, वहां आम लोगों की पीड़ा की थाह कौन लेगा?"

रसायनिक लेप लगाकर संरक्षित की गई लेनिन की लाश पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। 1924 में लेनिन को कई बार मस्तिष्काघात से गुजरना पड़ा और उनका निधन हो गया। इस शव को एक संग्रहालय में रखा गया है। दो महीनों की तैयारी के बाद मंगलवार को जब संग्रहालय को खोला गया तो लेनिन पुराने सूट में ही नजर आए।

इस शव का संरक्षण करने वाले संस्थान के निदेशक यूरी देनिसोव निकोल्स्की कहते हैं, "1992 के बाद से सरकार ने इसके संरक्षण के लिए एक भी कोपेक नहीं दिया। सब कुछ लेनिन फाउंडेशन और दानकर्ताओं की मदद के सहारे चल रहा है। अब तो मंदी आ गई है। ऐसे में हम दिवंगत लेनिन के लिए खास सूट मंगवाने के लिए मोटी रकम कहां से लाएं।"

यह सूट स्विटजरलैंड से मंगाया जाता रहा है। सवरेत्तम सामग्रियों से बने होने के कारण इसकी कीमत ज्यादा होती है। लिहाजा मुर्दा लेनिन ने छह साल से पोशाक नहीं बदली है!

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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