श्रीलंका में 95000 लोगों का पलायन, प्रभाकरन युद्ध क्षेत्र में (राउंडअप)

इस बीच सेना का कहना कि लिट्टे के दो नेताओं ने समर्पण कर दिया है और उसका प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन युद्ध क्षेत्र में मौजूद है। समर्पण करने वालों की पहचान मीडिया संयोजक वेलायुथम दयानिधि उर्फ दया मास्टर और बी. के. पंचरत्नम उर्फ जार्ज के रूप में की गई है। जार्ज लिट्टे की राजनीतिक शाखा के पूर्व प्रमुख एस.तमिलसेल्वन का अंग्रेजी अनुवादक था।

इधर, देश व दुनिया में संघर्ष को लेकर उठ रही आवाजों को देखते हुए श्रीलंका की सरकार ने राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई बासिल राजपक्षे को विशेष दूत के रूप में भारत भेजने का फैसला किया है। वहीं, भारत सरकार ने पड़ोसी देश से युद्ध प्रभावित क्षेत्र से नागरिकों के पलायन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भरोसे में लेने को कहा है।

कोलकाता में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पड़ोसी देश से संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भरोसे में लेने और भारत से भेजी गई राहत सामग्री का वितरण रेडक्रास जैसी संस्थाओं के माध्यम से कराने को कहा।

मुखर्जी ने कहा, "आतंकवादियों के प्रति हमारी कोई सहानुभूति नहीं है लेकिन नागरिकों के प्रति हमारी पूरी सहानुभूति है। हम सभी नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से निकलते हुए देखना चाहते हैं।"

कनाडा की राजधानी ओटावा में करीब 40 हजार तमिलों ने प्रदर्शन किया वहीं तमिलनाडु में इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म है। सत्ताधारी दल डीएमके ने संघर्ष के खिलाफ राज्य में गुरुवार को बंद का आह्वान किया है, जिसकी विपक्षी दलों ने आलोचना की है।

इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए उस पर श्रीलंका मामले में मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एक बयान जारी कर कहा कि श्रीलंका में सरकार और लिट्टे के बीच जारी संघर्ष में मारे जा रहे नागरिकों को बचाने के लिए कोलंबो पर दबाव बनाने में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है।

उधर, कोलंबो में रक्षा प्रवक्ता और विदेशी रोजगार मामलों के मंत्री केहेलिया रामबुकवेला ने कहा कि सेनाओं ने अभियान जारी रखते हुए नए इलाकों पर कब्जा किया है।

रामबुकवेला ने बुधवार को कहा कि लिट्टे के नियंत्रण में अब केवल आठ किलोमीटर की तटीय पट्टी या 12 से 14 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र बचा है। सरकार को पक्का भरोसा है कि प्रभाकरन अभी भी 'नो फायर जोन' में ही है।

सेना ने कहा कि जवान 'नो फायर जोन' में पुथुमथालन जंक्शन से आगे बढ़ रहे हैं और पूर्वी तट पर अपनी सुरक्षा स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। मंगलवार शाम के बाद से 'नो फायर जोन' वास्तव में दो हिस्सों में बंट गया है।

सेना ने कहा कि जवानों ने पुथुमथालन में नो फायर जोन में स्थित एक अस्पताल सहित चौकोर पट्टी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है।

इधर, नई दिल्ली में श्रीलंका के राजदूत सी.आर.जयसिंघे ने आईएएनएस से कहा कि उनकी सरकार की योजना राष्ट्रपति के भाई बासिल राजपक्षे को विशेष दूत के रूप में भारत भेजने की है, ताकि वह युद्ध क्षेत्र से हजारों नागरिकों के पलायन की स्थिति के बारे में भारत सरकार को विस्तृत जानकारी दे सकें। बताया जाता है कि अधिकांश शरणार्थियों के पास पहने हुए कपड़ों के अलावा शायद ही कोई सामान है।

श्रीलंकाई राजदूत ने 24 घंटे की चेतावनी के बाद लिट्टे पर अंतिम हमले की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान मानवीय आधार पर शुरू किया गया है। लिट्टे के कब्जे वाले इलाके से नागरिकों को बाहर निकालने के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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