कसाब को आरोप पत्र के अध्ययन के लिए 10 दिन का समय (लीड-1)
विशेष अदालत के न्यायाधीश एम.एल.तहिलयानी ने कसाब की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 11,500 पृष्ठों के आरोप पत्र की उर्दू प्रति उपलब्ध कराने की मांग की थी। अदालत ने कसाब और उसके वकील एस.जी.अब्बास काजमी को वर्तमान आरोप पत्र के अध्ययन के लिए 10 दिन का समय दिया है। फिलहाल आरोप पत्र हिंदी, अंग्रेजी और मराठी भाषाओं में उपलब्ध है। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।
काजमी ने संवाददाताओं को बताया कि आरोप पत्र के अध्ययन के लिए 10 दिन पर्याप्त नहीं हैं लेकिन यह मामले को समझने में कुछ मदद करेगा और उनका मुवक्किल मामले का थोड़ा-सा अहसास कर लेगा। काजमी ने कहा, "यह हमारी ओर से मामले को लटकाने की कोशिश नहीं है। हम सुनवाई के दौरान अदालत को पूरा सहयोग कर रहे हैं।"
इसके पहले विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कसाब की उम्र सुनिश्चित करने के लिए उसका डाक्टरी परीक्षण व दांतों का परीक्षण कराए जाने की मांग की। कसाब ने दावा किया है कि उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है और उसके मामले की सुनवाई बाल अदालत में की जानी चाहिए।
दूसरी ओर इस मामले में सहायक आरोपी लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध सबाहुद्दीन मोहम्मद के वकील एजाज नकवी ने अदालत में कहा कि उनका मुवक्किल चाहता है कि केंद्रीय मंत्री ए.आर.अंतुले और महाराष्ट्र के मंत्री नारायण राणे को सुनवाई के दौरान अदालत में गवाह के रूप में पेश किया जाए।
नकवी ने कहा कि दोनों मंत्रियों की गवाही से मामले में काफी मदद मिल सकती है, क्योंकि दोनों ने इस कांड के बारे में कई बयान दिए हैं।
सरकारी वकील उज्जवल निकम ने इसकी पुष्टि की है कि नकवी ने राणे और अंतुले को गवाही के लिए अदालत में बुलाए जाने की अपील की है। अंतुले ने हमलों में कुछ पुलिसकर्मियों के मारे जाने को लेकर शक जाहिर किया था। दूसरी ओर राणे ने तब यह बयान देकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था कि आतंकवादियों के कुछ नेताओं से रिश्ते रहे हैें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications