श्रीलंका में 81,000 से अधिक नागरिकों का पलायन, संघर्ष जारी (लीड-2)

इस बीच लिट्टे के दो नेताओं ने सेना के समक्ष समर्पण कर दिया है। इनकी पहचान मीडिया संयोजक वेलायुथम दयानिधि उर्फ दया मास्टर और जार्ज के रूप में की गई है। जार्ज लिट्टे की राजनीतिक शाखा के पूर्व प्रमुख एस.तमिलसेल्वन का अंग्रेजी अनुवादक था।

इधर, देश व दुनिया में संघर्ष को लेकर उठ रही आवाजों को देखते हुए श्रीलंका की सरकार ने राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई बासिल राजपक्षे को विशेष दूत के रूप में भारत भेजने का फैसला किया है। वहीं, भारत सरकार ने पड़ोसी देश से युद्ध प्रभावित क्षेत्र से नागरिकों के पलायन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भरोसे में लेने को कहा है।

कनाडा की राजधानी ओटावा में करीब 40 हजार तमिलों ने प्रदर्शन किया वहीं तमिलनाडु में इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म है। सत्ताधारी दल डीएमके ने संघर्ष के खिलाफ राज्य में बंद का आह्वान किया, जिसकी विपक्षी दलों ने आलोचना की है।

उधर, कोलंबों में अधिकारियों ने कहा कि सोमवार से अब तक 81,423 नागरिक लिट्टे के इलाके से पलायन कर सेना के कब्जे वाले क्षेत्र में आ चुके हैं। इससे इस वर्ष के आरंभ से आंतरिक विस्थापन के शिकार लोगों की संख्या 150,000 के पार पहुंच गई है।

रक्षा प्रवक्ता और विदेशी रोजगार मामलों के मंत्री केहेलिया रामबुकवेला ने कहा कि सेनाओं ने अभियान जारी रखते हुए नए इलाकों पर कब्जा किया है।

रामबुकवेला ने बुधवार को कहा कि लिट्टे के नियंत्रण में अब केवल आठ किलोमीटर की तटीय पट्टी या 12 से 14 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र बचा है। सरकार को पक्का भरोसा है कि प्रभाकरन अभी भी 'नो फायर जोन' में ही है।

उन्होंने कहा कि लिट्टे की सैनिक क्षमता समाप्त हो चुकी है। वे एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए वह बाहरी ताकतों का उपयोग श्रीलंका सरकार पर दबाव डालने के लिए कर रहे हैं। उनका संकेत पश्चिमी देशों की राजधानियों में हो रहे विरोध प्र्दशनों की ओर था।

सेना ने कहा कि जवान 'नो फायर जोन' में पुथुमथालन जंक्शन से आगे बढ़ रहे हैं और पूर्वी तट पर अपनी सुरक्षा स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। मंगलवार शाम के बाद से 'नो फायर जोन' वास्तव में दो हिस्सों में बंट गया है।

सेना ने कहा कि जवानों ने पुथुमथालन में नो फायर जोन में स्थित एक अस्पताल सहित चौकोर पट्टी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस बीच राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने आवश्यक सेवाओं के कमिश्नर जनरल को लोगों को खाद्य, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

इधर, नई दिल्ली में श्रीलंका के राजदूत सी.आर.जयसिंघे ने आईएएनएस से कहा कि उनकी सरकार की योजना राष्ट्रपति के भाई बासिल राजपक्षे को विशेष दूत के रूप में भारत भेजने की है, ताकि वह युद्ध क्षेत्र से हजारों नागरिकों के पलायन की स्थिति के बारे में भारत सरकार को विस्तृत जानकारी दे सकें। बताया जाता है कि अधिकांश शरणार्थियों के पास पहने हुए कपड़ों के अलावा शायद ही कोई सामान है।

श्रीलंकाई राजदूत ने 24 घंटे की चेतावनी के बाद लिट्टे पर अंतिम हमले की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान मानवीय आधार पर शुरू किया गया है। लिट्टे के कब्जे वाले इलाके से नागरिकों को बाहर निकालने के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य है।

कोलकाता में विदेश मंत्री प्रबण मुखर्जी ने पड़ोसी देश से संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भरोसे में लेने और भारत से भेजी गई राहत सामग्री का वितरण रेडक्रास जैसी संस्थाओं के माध्यम से कराने को कहा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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