सीधी में जीते चाहे कोई भी मगर हार अर्जुन सिंह की ही होगी !

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नीति निर्धारकों में से एक अर्जुन सिंह इस चुनाव में चाह कर भी बेटे अजय सिंह को सतना और बेटी वीणा सिंह को सीधी संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार नहीं बनवा पाए हैं। सीधी से कांग्रेस का टिकट न मिलने पर नाराज वीणा सिंह निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। यहां से कांग्रेस ने अर्जुन सिंह के ही करीबी इंद्रजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

बेटी के चुनाव मैदान में होने के बावजूद अर्जुन सिंह सीधी में कांग्रेस का प्रचार करने गए हैं। उन्होंने यहां भरे गले से मतदाताओं से कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की है। अर्जुन सिंह के राजनीतिक जीवन में यह पहला मौका है जब वह इस तरह की उलझन में फंस गए हैं। एक तरफ पार्टी है तो दूसरी ओर बेटी है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक समीक्षक लज्जाशंकर हरदेनिया भी मानते हैं कि अर्जुन सिंह पहली बार ऐसी दुविधा में फंसे हैं। साथ ही वह कहते है कि पर्दे के पीछे की भी कुछ राजनीति है जिसे हर कोई नहीं समझ सकता। फिर भी इतना तय है कि सहानुभूति का लाभ बेटी को मिल सकता है।

यह ऐसा चुनाव है चाहे कांग्रेस का उम्मीदवार जीते अथवा बेटी, मगर हार तो अर्जुन सिंह की ही होगी। पार्टी हारती है तो एक नेता के तौर पर उनकी हार मानी जाएगी और अगर बेटी हार जाती है तो एक बाप की हार मानी जाएगी। अर्जुन सिंह के लिए यह ऐसा अवसर है जब उन्हें परास्त होना ही होगा। पहले बेटे और बेटी को टिकट न दिला पाने पर अर्जुन सिंह को पार्टी के अंदर हार का सामना करना पड़ा और अब चुनाव में हार तय दिख रही है। इस तरह इस लोकसभा के चुनाव में अर्जुन सिंह के खाते में सिर्फ हार ही आते दिख रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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