श्रीलंका में युद्ध क्षेत्र से 81,000 नागरिकों का पलायन (लीड-1)
कोलंबो, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पिछले 48 घंटे में श्रीलंका के युद्ध क्षेत्र से 81,000 से अधिक नागरिक पलायन कर चुके हैं। उधर, आगे बढ़ती हुई सेना ने लिट्टे को उत्तर पूर्व के एक छोटे से तटीय इलाके में धकेल दिया है।
अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि सोमवार से 81,423 नागरिक लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के इलाके से पलायन करके सेना के कब्जे वाले क्षेत्र में आ चुके हैं। इससे इस वर्ष के आरंभ से आंतरिक विस्थापन के शिकार लोगों की संख्या 150,000 के पार पहुंच गई है।
रक्षा प्रवक्ता और विदेशी रोजगार मामलों के मंत्री केहेलिया रामबुकवेला ने कहा कि सेनाओं ने अभियान जारी रखते हुए नए इलाकों पर कब्जा किया है।
रामबुकवेला ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि लिट्टे के नियंत्रण में अब केवल आठ किलोमीटर की तटीय पट्टी या 12 से 14 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र बचा है। सरकार को पक्का भरोसा है कि प्रभाकरन अभी भी नो फायर जोन में ही है।
उन्होंने कहा कि लिट्टे की सैनिक क्षमता समाप्त हो चुकी है। वे एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए वह बाहरी ताकतों का उपयोग श्रीलंका सरकार पर दबाव डालने के लिए कर रहे हैं। उनका संकेत पश्चिमी देशों की राजधानियों में हो रहे विरोध प्र्दशनों की ओर था।
सेना ने कहा कि जवान 'नो फायर जोन' में पुथुमथालन जंक्शन से आगे बढ़ रहे हैं और पूर्वी तट पर अपनी सुरक्षा स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। मंगलवार शाम के बाद से 'नो फायर जोन' वास्तव में दो हिस्सों में बंट गया है।
सेना ने कहा कि जवानों ने पुथुमथालन में नो फायर जोन में स्थित एक अस्पताल सहित चौकोर पट्टी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है।
जहां नो फायर जोन से नागरिकों का पलायन लगातार जारी है, वहीं राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने आवश्यक सेवाओं के कमिश्नर जनरल को लोगों को खाद्य, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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