तालेबान इस्लामाबाद से सौ किलोमीटर दूर

गृह मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार रहमान मलिक ने इस बात की पुष्टि की है कि तालेबान विद्रोहियों ने सीमावर्ती ज़िले बुनेर के कई हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार चरमपंथी बुनेर में स्वात घाटी से आ रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने पिछले दिनों एक समझौते के तहत स्वात घाटी में शरीयत क़ानून लगाने की स्वीकृति दे दी थी.
स्थानीय पुलिस का कहना है कि विद्रोहियों ने बुनेर में एक अस्पताल और कई राहत संस्थाओं पर हमले किए हैं.
चरमपंथी मस्जिदों और सरकारी दफ़्तरों को अपने क़ब्ज़े में लेने के प्रयास कर रहे हैं.
बुनेर
हमने शरियत क़ानून तालेबान की वजह से ही नहीं बल्कि लोगों की माँग को भी ध्यान में रखते हुए लागू किया मियां इफ़्तिख़ार हुसैन, उत्तरी पश्चमी सूबे के अधिकारी
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बूनेर मालाकंद इलाक़े का एक हिस्सा है जहाँ पिछले दिनों इस्लामी शरीयत क़ानून लागू करने के बारे में समझौता हुआ था.
पिछले दिनों पाकिस्तान सरकार ने कट्टर धार्मिक नेताओं के साथ एक शांति समझौता किया था जिसके तहत स्वात घाटी में शरीयत क़ानून को मानने और तालेबान ने संघर्षविराम की हामी भरी थी.
स्वात घाटी में नवंबर 2007 से सरकारी सेनाओं और चरमपंथियों के बीच ख़ूनी संघर्ष होते रहे हैं जिसमें अब तक कम से कम 1200 आम नागरिक मारे गए हैं.
उत्तरी-पश्चिमी सूबे के सूचना मंत्री मियां इफ़्तिख़ार हुसैन ने बताया कि उनके पास तालेबान चरमपंथियों के गतिविधियों के फैलने की ख़बर पहुँची है.
ख़बरों के मुताबिक बुनेर में काम कर रहे अंतर्राष्ट्रीय विकास और सहायता एजेंसियों के दफ़्तरों में चरमपंथियों ने तोड़फोड़ की.
इन एजेंसियों के कुछ कर्मचारियों को कुछ समय के लिए बंधक भी बनाया गया था, हालांकि सोमवार को फिर उन्हें रिहा कर दिया गया.
तालेबान ने कार में संगीत सुनने पर इन इलाकों में पाबंदी लगा दी है और मस्जिद के माध्यम से वे युवाओं को उनके गुटों में शामिल होने के प्रेरित कर रहे हैं.
बुनेर के पुलिस प्रमुख राशिद ख़ान का कहना है कि पुलिस ने तालेबान के ख़िलाफ़ इस मामले में शिकायत दर्ज की है.
गश्त
इस इलाके में तालेबान ने नियमित रूप से गश्त लगाने भी शुरु कर दिए हैं.
मियां इफ़्तार हुसैन का कहना है कि शांति समझौते के तहत तालेबान को हथियार डालने होंगे.
उन्होंने कहा, "यहाँ तक कि सूफी मोहम्मद ने भी कहा था कि तालेबान के पास हथियार नहीं डालने का कोई कारण ही नहीं है."
ग़ौरतलब है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह के ससुर और धार्मिक नेता सूफ़ी मोहम्मद सरकार और चरमपंथियों के बीच समझौते के लिए प्रयास कर रहे थे.
हुसैन ने कहा, "हमने शरियत क़ानून तालेबान की वजह से ही नहीं बल्कि लोगों की माँग को भी ध्यान में रखते हुए लागू किया."
इस बीच तालेबान ने कहा है कि जब तक पूरी तरह से शरियत लागू नहीं हो जाती वे घाटी में अपनी गतिविधियाँ जारी रखेंगे साथ ही हथियार नहीं डालेंगे.
स्वात में मौजूद तालेबान के प्रवक्ता मुस्लिम ख़ान ने कहा, "हमने ग़ैर सरकारी संस्थाओँ से कहा है कि वे मालाकंद से दूर रहें."


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