सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगे की जांच रिपोर्ट लीक होने पर सख्त आपत्ति जताई
न्यायमूर्ति अरिजित पसायत, न्यायमूर्ति पी.सथाशिवम और न्यायमूर्ति आफताब आलम की खंडपीठ ने कहा, "यह एक ऐसे व्यक्ति द्वारा अदालत के साथ किया गया विश्वासघात है, जिस पर अदालत ने भरोसा किया था।"
खंडपीठ ने कहा, "हम ऐसी हरकतों को सत्यापित नहीं करते।"
अदालत को जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर.के.राघवन के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के लीक होने के बारे में बताया गया तो अदालत आगबबूला हो उठी।
रिपोर्ट लीक होने की घटना की निंदा करते हुए न्यायमूर्ति पसायत ने कहा, "यह अदालत के साथ विश्वासघात है और इसकी निंदा के लिए हमारे पास कोई शब्द नहीं है।"
ज्ञात हो कि राघवन वर्ष 2002 में फरवरी और मार्च महीने के दौरान गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद गुजरात में भड़के सांप्रदायिक दंगे के कुछ अति महत्वपूर्ण व जघन्य आपराधिक मामलों की जांच कर रहे थे।
जांच आयोग की रिपोर्ट के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, "हत्या और हिंसा की कई घटनाएं मनगढ़ंत थीं और पुलिस प्रमुख पी.सी.पांडे के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे थे। झूठे गवाहों को प्रताड़ित कर उन्हें काल्पनिक घटनाओं के बारे में झूठे सबूत देने के लिए विवश किया गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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