श्रीलंका में विद्रोहियों के इलाके से 52,000 नागरिकों का पलायन, लिट्टे का समर्पण से इंकार (लीड-3)
सरकारी 'डेली न्यूज' ने इसे मानवीय तूफान की संज्ञा दी है जबकि स्वतंत्र 'डेली मिरर' ने इसे 'महान बचाव' कहा है।
पुरुष, महिलाएं और बच्चे सेना के कब्जे वाले इलाके की ओर पलायन कर रहे हैं, अधिकांश के पास केवल एक छोटा झोला, जिसमें शायद व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं हैं।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 58 डिवीजन के जवानों ने गैर गोलीबारी क्षेत्र के पुथुमंथालमऔर अंपालावनपोक्कनई इलाके में मंगलवार सुबह प्रवेश किया, जहां से एक दिन पहले उन्होंने 31,000 नागरिकों को सुरक्षित बचाया था। सेना इस इलाके में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।
उधर, तमिल विद्रोहियों ने मंगलवार को दावा किया कि सोमवार को जारी सेना की कार्रवाई में 1,000 नागरिकों की मौत हुई और 2,300 घायल हुए हैं। इसके कारण करीब 50,000 लोग इलाके से भाग गए हैं।
विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कहा कि युद्ध क्षेत्र से नागरिकों को निकालने की श्रीलंकाई सेना की कार्रवाई के कारण नागरिकों की मौतों की संख्या बढ़ी है।
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रास समिति (आईसीआरसी) से घायलों को क्षेत्र से निकालने का आग्रह किया।
श्रीलंकाई सेना के अधिकारियों ने विद्रोहियों के इस दावे का खंडन किया है कि उसके बचाव अभियान के कारण ज्यादा नागरिकों की मौतें हुई हैं।
बहरहाल सेनाओं ने अपना अभियान जारी रखते हुए लिट्टे के एक सदस्य द्वारा संचालित एक पुलिस स्टेशन सहित लिट्टे के कुछ अंतिम मजबूत ठिकानों पर कब्जा कर लिया। सरकारी सेना ने एक तटीय इलाके पर भी कब्जा कर लिया, जिसका उपयोग सरकार और अतंर्राष्ट्रीय संगठनों से भेजे गए खाद्यान्नों को उतारने के लिए होता था।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सेना ने पुथुमथालन इलाके में हुए संघर्ष में चार गुरिल्लाओं को मार गिराया।
नागरिकों को सुरक्षित रखने के इरादे से इस इलाके को पहले सरकार ने 'गोलीबारी मुक्त क्षेत्र' घोषित किया था। परंतु अब विद्रोही और सेना इस इलाके में युद्धरत हैं।
सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने आईएएनएस को बताया कि लिट्टे विद्रोहियों ने समय सीमा के भीतर समर्पण नहीं किया। परंतु उनके कब्जे वाले छोटे से इलाके से नागरिकों का सरकारी कब्जे वाले इलाके में पलायन सोमवार से जारी है।
सेना प्रवक्ता ने मंगलवार दोपहर को कहा कि सोमवार से करीब 49,000 से अधिक नागरिक लिट्टे के इलाके से सरकारी कब्जे वाले क्षेत्र पुथुकुदुयिरुप्पु में पहुंच चुके हैं।
सेना ने नागरिकों को रोकने के लिए लिट्टे द्वारा बनाई गई किलेबंदी को तोड़कर वहां फंसे नागरिकों के सरकार के कब्जे वाले इलाके में आने का रास्ता साफ कर दिया।
श्रीलंका सरकार ने लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन और उसके साथियों को मंगलवार दोपहर तक समर्पण करने की चेतावनी दी थी। नानायक्कारा ने कहा कि समय सीमा के बावजूद सेना नागरिकों को बचाने और यथा संभव शीघ्र समय में लिट्टे का सफाया करने का कार्य जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि विश्वस्त खुफिया जानकारी के अनुसार प्रभाकरन और लिट्टे का खुफिया प्रमुख पोट्टु अम्मन अभी भी इलाके में ही हैं।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता खेलिया रम्बुकवेला ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया था, "हमने प्रभाकरन और उसके संगठन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। नहीं तो उन्हें सैन्य कार्रवाई का सामना करना होगा।"
लिट्टे का कब्जा अब केवल 12 वर्ग किलोमीटर से भी कम इलाके पर रह गया है। इसमें सरकार द्वारा घोषित सुरक्षित क्षेत्र पुथुमथालन भी है।
सोमवार से पहले जनवरी से अब तक 68 हजार तमिल नागरिक विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से पलायन कर चुके थे। सरकार के अनुसार बंधकों को बचाने का यह दुनिया का सबसे बड़ा अभियान है क्योंकि विद्रोही नागरिकों को सरकारी कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने में लगे हैं।
सोमवार को तीन महिला आत्मघाती हमलावरों ने नागरिकों को पलायन करने से रोकने के लिए विस्फोट किए । इनमें 17 लोग मारे गए और 200 घायल हो गए।
लिट्टे ने सेना पर पर आरोप लगाया कि वह सुरक्षित क्षेत्र में गोलीबारी करके नागरिकों को सरकार के कब्जे वाले इलाके में जाने के लिए बाध्य कर रही है।
उसके इस दावे का स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिल सका क्योंकि सरकार ने युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों का प्रवेश रोक दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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