लिट्टे आतंकवादी संगठन और प्रभाकरन घोषित अपराधी : प्रधानमंत्री (लीड-2)
प्रधानमंत्री ने एक समाचार चैनल से विशेष बातचीत में कहा, "लिट्टे और प्रभाकरन के संबंध में कांग्रेस पार्टी ने पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। लिट्टे आतंकवादी संगठन है और प्रभाकरन एक घोषित अपराधी है। जहां तक हमारी सरकार का सवाल है तो लिट्टे और प्रभाकरन के संबंध में हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।"
उल्लेखनीय है कि करुणानिधि ने प्रभाकरन को अपना अच्छा 'मित्र' बताया था और कहा था कि लिट्टे आतंकवादी संगठन नहीं है। अपने इस बयान को लेकर उठे राजनीतिक बवंडर को देखते हुए अगले ही दिन वह अपने बयान से पलट गए। प्रधानमंत्री करुणानिधि के इसी बयान पर टिप्पणी कर रहे थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इससे पहले सोमवार को ही करुणानिधि के बयान को उनका व्यक्तिगत विचार कहकर खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस की नजर में प्रभाकरन एक आतंकवादी और लिट्टे एक आतंकवादी संगठन है।
इस बीच, प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के साथ-साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के घटक दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे आरोप लगते हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एक स्थायी सरकार के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आना होगा।
विपक्ष खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ चले तनाव व शब्द युद्ध के बाद माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इसे 'दुखदायी' नहीं मानते। उन्होंने कहा, "नोकझोंक तो होती रहती है।"
उन्होंने कहा, "जब हम सरकार बनाएंगे तो मुख्य विपक्षी दल के साथ विश्वास का संबंध कायम करने में सफल होंगे।"
उन्होंने कहा, "मैं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से परे इस देश का कोई भविष्य नहीं देख रहा हूं।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के उन आरोपों के संदर्भ में जिसमें उन्होंने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया था, प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे आरोप लगते हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हम गठबंधन सरकार चला रहे हैं। यह गठबंधन 2004 के चुनाव के बाद बना था। एक गठबंधन में यदि एक सहयोगी दूसरे की आलोचना करता है तो मैं नहीं समझता हूं कि इसे गंभीरता से लेना चाहिए।"
उन्होंने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में न्याय मिलने में हुई देरी के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि यदि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनती है तो न्यायिक प्रक्रिया में सुधार लाना उनकी प्राथमिकता होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं मानता हूं कि अपने देश में न्याय की प्रक्रिया काफी धीमी लेकिन उस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है।"
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो न्यायिक सुधार उनकी प्राथमिकता में होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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