चुनाव अयोग ने वरुण की अपील खारिज की
उपचुनाव आयुक्त आर.बालाकृष्णन ने यहां संवाददाताओं को बताया, "आयोग को वरुण गांधी का एक पत्र प्राप्त हुआ है। आयोग ने पत्र पर विचार किया। लेकिन चुनाव आयोग को पीलीभीत के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को स्थानांतरित करने का कोई कारण समझ में नहीं आया।"
अपने विवादास्पद बयानों के बाद रासुका का सामना कर रहे वरुण गांधी को सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल को जमानत पर रिहा किया था। रिहा होने के बाद 16 अप्रैल को ही वरुण ने चुनाव आयोग को तीन पृष्ठों का एक पत्र भेजा था। पत्र में उन्होंने 22 अप्रैल को अपने नामांकन के दौरान निष्पक्ष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के लिए चुनाव आयोग से निवेदन किया था। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर राजनीतिक दुर्भावनावश काम करने का आरोप लगाया था और जिले के दो शीर्ष अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग की थी।
वरुण गांधी ने अपने पत्र में लिखा था कि उन्हें इस बात का डर है कि जिला प्रशासन कहीं गलत तरीके से उनके नामांकन फार्म को ही निररस्त न कर दे।
बालाकृष्णन ने कहा कि चुनाव आयोग पीलीभीत की संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए है और नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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