आरबीआई ने की महत्वपूर्ण दरों में कटौती (राउंडअप)

आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने सालाना मौद्रिक समीक्षा नीति जारी करते हुए व्यावसायिक बैंकों से ऋण सस्ता करने की अपील करते हुए कहा कि इन बैंकों ने आरबीआई द्वारा दरों में की गई कटौती के साथ न्याय नहीं किया है।

उन्होंने पत्रकारों के साथ चर्चा में कहा, "बैंकों को दरों में की गई कटौती का फायदा उधार दरों में कटौती कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था छह फीसदी की दर से विकसित होगी जबकि मुद्रास्फीति की दर बढ़कर चार फीसदी हो सकती है।

बैंक ने रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में 0.25 फीसदी अथवा 25 आधार अंकों की कमी करने की घोषणा की। इसके साथ ही रेपो दर पांच फीसदी से घटकर 4.75 फीसदी जबकि रिवर्स रेपो दर 3.5 फीसदी से घटकर 3.25 फीसदी हो जाएगी। यद्यपि आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई परिवर्तन नहीं किया है और उसे पांच फीसदी पर स्थिर रखा।

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक जिस ब्याज दर पर अन्य बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो दर कहते हैं जबकि इसके उलट बैंक जिस दर इन बैंकों से कर्ज लेता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं।

सुब्बाराव ने कहा, "सामान्य मानसून के अनुमान के साथ वर्ष 2009-10 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वास्तविक विकास दर छह फीसदी के आसपास रहेगी।" वर्ष 2008-09 में यह दर 7.1 फीसदी रही।

बैंक ने यह भी कहा कि मार्च 2010 के अंत तक मुद्रास्फीति की दर बढ़कर चार फीसदी तक हो सकती है। बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति की दरों में बढ़ोतरी जरूर होगी लेकिन उससे पहले यह दर नकारात्मक हो सकती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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