लिट्टे ने श्रीलंका सरकार का अल्टीमेटम ठुकराया (लीड-1)
सरकार की चेतावनी की समय सीमा समाप्त होने के तुरंत बाद सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने आईएएनएस को बताया कि लिट्टे विद्रोहियों ने समय सीमा के भीतर समर्पण नहीं किया। परंतु उनके कब्जे वाले छोटे से इलाके से नागरिकों का सरकारी कब्जे वाले इलाके में पलायन सोमवार से जारी है।
सेना प्रवक्ता ने मंगलवार दोपहर को कहा कि सोमवार से करीब 49,000 से अधिक नागरिक लिट्टे के इलाके से सरकारी कब्जे वाले क्षेत्र पुथुकुदुयिरुप्पु में पहुंच चुके हैं।
सेना ने नागरिकों को रोकने के लिए लिट्टे द्वारा बनाई गई किलेबंदी को तोड़कर वहां फंसे नागरिकों के सरकार के कब्जे वाले इलाके में आने का रास्ता साफ कर दिया।
श्रीलंका सरकार ने लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लै प्रभाकरन और उसके साथियों को मंगलवार दोपहर तक समर्पण करने की चेतावनी दी थी। नानायक्कारा ने कहा कि समय सीमा के बावजूद सेना नागरिकों को बचाने और यथा संभव शीघ्र समय में लिट्टे का सफाया करने का कार्य जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि विश्वस्त खुफिया जानकारी के अनुसार प्रभाकरन और लिट्टे का खुफिया प्रमुख पोट्टु अम्मन अभी भी इलाके में ही हैं।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता खेलिया रम्बुकवेला ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया था, "हमने प्रभाकरन और उसके संगठन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। नहीं तो उन्हें सैन्य कार्रवाई का सामना करना होगा।"
लिट्टे का कब्जा अब केवल 12 वर्ग किलोमीटर से भी कम इलाके पर रह गया है। इसमें सरकार द्वारा घोषित सुरक्षित क्षेत्र पुथुमथालन भी है।
सोमवार से पहले जनवरी से अब तक 68 हजार तमिल नागरिक विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से पलायन कर चुके थे। सरकार के अनुसार बंधकों को बचाने का यह दुनिया का सबसे बड़ा अभियान है क्योंकि विद्रोही नागरिकों को सरकारी कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने में लगे हैं।
सोमवार को तीन महिला आत्मघाती हमलावरों ने नागरिकों को पलायन करने से रोकने के लिए विस्फोट किए । इनमें 17 लोग मारे गए और 200 घायल हो गए।
लिट्टे ने सेना पर पर आरोप लगाया कि वह सुरक्षित क्षेत्र में गोलीबारी करके नागरिकों को सरकार के कब्जे वाले इलाके में जाने के लिए बाध्य कर रही है।
उसके इस दावे का स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिल सका क्योंकि सरकार ने युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों का प्रवेश रोक दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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