बहिष्कार के बीच नस्लवाद पर सम्मेलन शुरू
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उद्घाटन भाषण में कहा कि सम्मेलन के बहिष्कार को लेकर वह बहुत निराश हैं।
मून ने कहा, "जिन राष्ट्रों को एक बेहतर भविष्य के लिए रास्ता तैयार करने हेतु काम करना चाहिए, वे यहां उपस्थित नहीं हैं। मुझे गहरा खेद है कि कुछ ने सम्मेलन से दूर रहने का विकल्प चुना है। लेकिन मुझे भरोसा है कि वे ज्यादा समय तक ऐसा नहीं करेंगे।"
बान ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई के साथ चेताया कि ताजा आर्थिक और वित्तीय संकट नस्लवाद के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। उन्होंने राष्ट्रों से संकट के समय सतर्क रहने के लिए कहा।
अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, इटली, न्यूजीलैंड और अन्य कई देशों ने सम्मेलन का बहिष्कार किया है। इन देशों का कहना है कि सम्मेलन के लिए तैयार घोषणा पत्र उनके लिए अस्वीकार्य है।
नेल्शन मंडेला ने एक दूत के जरिए सम्मेलन को संबोधित किया और कहा कि राष्ट्रों के बीच विचारों का राजनीतिक मतभेद नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई को रोक नहीं सकता।
हालांकि घोषणा पत्र के मसौदे में से कई सारे विवादित अंशों और वर्गो को निकाल दिया गया है, फिर भी नया मसौदा बहिष्कार में शामिल राष्ट्रों को रास नहीं आया है।
बहरहाल, सम्मेलन में ब्रिटेन और फ्रांस हिस्सा ले रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सम्मेलन में महत्वपूर्ण वक्ता के रूप में होंगे।
नार्वे व दक्षिण अफ्रीका ने अपने विदेश मंत्रियों को सम्मेलन में भेजा है। कई अन्य अफ्रीकी देशों ने भी अपने मंत्रियों को सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भेजा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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