लिट्टे के इलाकों से 30,000 नागरिक बच निकले, विस्फोट में 17 मरे (लीड-2)
कोलंबो, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। श्रीलंका के उत्तरी युद्ध क्षेत्र से सोमवार को 30,000 से अधिक नागरिक सुरक्षित बच निकलने में सफल रहे जबकि तमिल विद्रोहियों के आत्मघाती विस्फोट में 17 लोग मारे गए।
सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायाक्कारा ने बताया कि नागरिकों को बचाने का अभियान लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे)के कड़े प्रतिरोध के बावजूद रविवार रात को आरंभ किया गया। सेना ने पुथुमथालन इलाके में लिट्टे द्वारा बनाए गए तीन किलोमीटर लंबे मिट्टी के बांध पर कब्जा कर लिया। इसके बाद से करीब 30,000 नागरिक सेना के नियंत्रण वाले इलाके में प्रवेश कर चुके हैं। इनमें भारी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
सेना प्रवक्ता ने पलायन कर रहे नागरिकों पर लिट्टे द्वारा गोले दागने का भी आरोप लगाया।
रक्षा मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा कि सोमवार सुबह नागरिकों का पलायन रोकने के लिए लिट्टे ने एक आत्मघाती हमला भी किया, इसमें महिलाओं और बच्चों सहित 17 नागरिक मारे गए।
सरकारी टेलीविजन ने हजारों नागरिकों के भागकर सेना के नियंत्रण वाले इलाके में प्रवेश करने के दृश्यों को दिखाया है। सेना के नियंत्रण वाला इलाका लोगों से भर गया है। इनमें से अधिकांश के पास बच्चों और एक झोले के सिवाय कुछ नहीं है।
सरकारी टेलीविजन के अनुसार इस निर्णायक मौके पर भी सेना के अधिकारियों ने लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन और उसके साथियों से संपूर्ण विनाश से बचने के लिए शस्त्र त्यागने और समर्पण करने को कहा है।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि करीब 12 किलोमीटर के तटवर्ती इलाके में पिछले तीन महीने से हजारों नागरिकों को बंधक बना कर रखा गया है। इनमें से कुछ ग्रामीण निकल भागने में भी सफल हुए।
सेना के अनुमान के अनुसार करीब 70 हजार नागरिक अभी भी तटीय इलाके में फंसे हुए हैं, जहां पेयजल की भारी कमी है। सरकार ने इन इलाकों में जहाजों से खाद्यान्न भेजा है।
एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2009 के आरंभ में तमिल विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके से भागकर करीब 68,000 नागरिक सरकार के नियंत्रण वाले शिविरों में गुजारा कर रहे हैं।
सेना का दावा है कि लिट्टे का सफाया करने के लिए सैनिक अभियान निर्णायक चरण में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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