प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व नहीं, कार्यप्रणाली कमजोर है : सुषमा
स्वराज ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आडवाणी ने मनमोहन सिंह को खुली बहस और जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ने की बात कही थी। प्रधानमंत्री जब दोनों ही बातों को टाल गए तब उनपर यह टिप्पणी की गई।
स्वराज ने कहा, "लोकतंत्र में लोकसत्ता जनता है, इसलिए उन्हें जनता के बीच जाकर उसका भरोसा जीतना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो जनता आप पर भी भरोसा क्यों करे।"
प्रचार के दौरान तमाम नेताओं द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को स्वराज ने लोकतंत्र के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि वह असंयमित भाषा के साथ आचरण की भी विरोधी है, इसलिए उन्होंने मध्य प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री रंजना बघेल द्वारा एक महिला के साथ तथाकथित अभद्रता पर भी खेद जताया था।
उन्होंने कहा,"राजनीति में प्रतिद्वंदी होते हैं शत्रु नहीं, विरोधी होते हैं दुश्मन नहीं। इसलिए विचारधारा की लड़ाई होनी चाहिए और नीति का विरोध। निचले स्तर पर जाकर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उचित नहीं है।"
उन्होंने कहा कि 13 मई को चुनाव खत्म हो जाएंगे और नेताओं का सदन में मिलना-जुलना होगा तथा वे मिलकर सेन्ट्रल हॉल में कॉफी भी पिएंगे। इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे आपस में मिलने पर शर्मिदगी महसूस हो।
स्वराज ने बढ़ती महंगाई के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह के रहते महंगाई कम होना असंभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री के बीच द्वंद्व चलता है।
स्वराज ने कांग्रेस के युवा नेताओं को 'अनुकंपा नियुक्ति' वाला नेता करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रिया दत्त, जतिन प्रसाद या सचिन पायलट। ये सभी पिता के जाने से रिक्त हुए स्थान पर आएं हैं।
लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर स्वराज को उम्मीद है कि भाजपा सबसे बड़ा दल बनकर उभरेगी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बहुमत का जादूई आंकड़ा पा लेगा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में भाजपा को कम से कम 27 सीटें हासिल होंगी वहीं कांग्रेस को तुक्के में दो सीटें मिल सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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