चुनाव प्रचार की फिजा से अछूता है निठारी गांव
नोएडा, 18 अप्रैल(आईएएनएस)। मासूम बच्चों के सनसनीखेज सिलसिलेवार संहार का गवाह रहे निठारी गांव में चुनाव प्रचार की बहुरंगी फिजा नदारद है। न तो यहां चुनावी पोस्टर, बैनर नजर आ रहे हैं और न ही नेताओं की आवाजाही हो रही है।
गांव वालों का कहना है कि इस चुनावी मौसम में भी नेताओं को इस गांव की सुध लेने की फुर्सत नहीं है। जब बच्चों के संहार का खुलासा हुआ था तो नेताओं में यहां आने की होड़ लगी थी। दिल्ली के बाहरी छोर पर स्थित निठारी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्घ नगर संसदीय क्षेत्र में आता है। इस गांव में 2500 मतदाता हैं।
निठारी नरसंहार में अपने पुत्र को खो देने वाले रामकिशन कहते हैं, "कोई उम्मीदवार यहां वोट मांगने नहीं आया है। जब नरसंहार का खुलासा हुआ था तो नेताओं का यहां जमघट लगा हुआ था। सोनिया गांधी, आडवाणी, मायावती, मुलायम सिंह सभी ने हमसे झूठे वादे किए। सोनिया ने मदद का वादा किया था, वहीं मुलायम ने नौकरी का। चुनाव के दौरान भी कोई हमारी समस्या सुनने नहीं आ रहा है। हमने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है।"
नरसंहार की भेंट चढ़े एक अन्य बच्चे के पिता पप्पूलाल का कहना है कि यहां के कई लोगों के पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है। किसी भी नेता ने उन्हें पहचान पत्र दिलाने की कोशिश नहीं की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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