इक़बालिया बयान से पलटा क़साब

इक़बालिया बयान से पलटा क़साब

मुंबई हमलों की सुनवाई के पहले दिन अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपने प्रारंभिक वक्तव्यों को रखा.

अभियोजन पक्ष ने कसाब के ख़िलाफ़ 166 लोगों की हत्या का आरोप लगाया और कहा कि इस हमले की साज़िश पाकिस्तान में रची गई जिसका उद्देश्य भारत के विरूद्ध युद्ध छेड़ना था.

बचाव पक्ष ने अपनी दलील में कहा है कि क़साब की उम्र 18 वर्ष से कम है इसलिए उसपर मुक़दमा बाल अदालत में चलाया जाना चाहिए.

विशेष अदालत ने क़साब के नाबालिग़ होने की याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसके बाद काज़मी ने अदालत से क़साब के इक़बालिया बयान को पलटे जाने के लिए आग्रह किया.

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमलों में 170 से अधिक लोग मारे गए थे. सुरक्षाबलों की कार्रवाई में नौ हमलावर भी मारे गए थे.

सुनवाई

मोहम्मद अजमल आमिर कसाब पर 166 लोगों की हत्या का आरोप लगाया गया है

मुंबई हमलों की सुनवाई कई अड़चनों के बाद शुक्रवार को शुरू हुई. सुनवाई मुंबई के आर्थर रोड जेल में बनी विशेष अदालत में हो रही है.

इस मुक़दमे में मुख्य अभियुक्त पकड़े गए एकमात्र कथित हमलावर पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद अजमल आमिर क़साब को बनाया गया है.

दो भारतीय नागरिकों - फ़हीम अंसारी और सबाउद्दिन अहमद को - भी अभियुक्त बनाए गए हैं जिनपर चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा से जुड़े होने का आरोप है.

मुख्य अभियुक्त कसाब के ऊपर 26 नवंबर 2008 को मुंबई में 166 लोगों की हत्या करने का आरोप लगाया गया है. मुंबई पुलिस ने हमले के सिलसिले में 11 हज़ार पन्नों का आरोप पत्र दाख़िल किया है.

कुल मिलाकर कसाब और अन्य दोनों अभियुक्तों के विरूद्ध चरमपंथी हमलों से जुड़े 12 मामलों में आरोप दायर किए गए हैं.

दलील

हालाँकि ताज और ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस में गोलीबारी के समय क़साब मौजूद नहीं थे लेकिन उन्हें षडयंत्र में शामिल रहने के आधार पर हत्या का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है उज्जवल निकम, सरकारी वकील

हालाँकि ताज और ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस में गोलीबारी के समय क़साब मौजूद नहीं थे लेकिन उन्हें षडयंत्र में शामिल रहने के आधार पर हत्या का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है

सुनवाई के पहले दिन सरकारी वकील ने कहा कि हमले का मक़सद देश के ख़िलाफ़ युद्ध के साथ-साथ कश्मीर को हथियाना था.

शुक्रवार को मुंबई हमले की सुनवाई के पहले दिन सरकारी वकील उज्जवल निकम ने अदालत में कहा कि हमले की साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी और उसका मक़सद भारत के ख़िलाफ़ जंग और कश्मीर पर क़ब्ज़ा करना था.

निकम ने दावा किया कि उनके पास पुख़्ता सबूत हैं और इस सिलसिले उन्होंने क़साब का इक़बालिया बयान भी पढ़कर सुनाया.

उज्जवल निकम ने कहा,"हालाँकि ताज और ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस में गोलीबारी के समय क़साब मौजूद नहीं थे लेकिन उन्हें षडयंत्र में शामिल रहने के आधार पर हत्या का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है".

निकम ने कहा कि बंदूकधारियों को "ख़ुफ़िया पेशेवरों" से प्रशिक्षण मिला था. निकम ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने एक "मेजर जेनरल" का उल्लेख किया जिसने उनके अनुसार अभियुक्तों को प्रशिक्षण दिया और समुद्र के रास्ते हमला करने के बारे में समझाया.

वहीं कसाब के नए वकील अब्बास काज़मी ने अपनी आरंभिक दलील में कहा कि उनके मुवक्किल की उम्र 18 वर्ष से कम है इसलिए मुक़दमे की सुनवाई बाल अदालत में होनी चाहिए.

लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि उनके पास ऐसे साक्ष्य है जिसकी बुनियाद पर साबित किया जा सकता है कि क़साब की उम्र 21 साल है.

उनका कहना था कि क़साब के वकील के पास कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं हैं जिससे यह साबित किया जा सके कि वो नाबालिग़ है.

सुनवाई के दौरान क़साब ने कुछ नहीं कहा और ना ही वो मुस्कुराया. बुधवार को अदालत में लाए जाने के बाद कसाब वहाँ की कार्रवाई देख मुस्कुरा रहा था.

बुधवार को अदालत ने क़साब के लिए पहले नियुक्त वकील अंजलि वाघमारे को इस आधार पर मुक़दमा लड़ने से रोक दिया कि उन्होंने मुंबई हमले के एक प्रभावित का भी मुक़दमा लड़ने के लिए हामी भर दी थी.

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