फिर हो सकता है 'मुंबई' जैसा हमला

अंतर्राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (स्ट्रेटफोर) ने अपने दूसरे तिमाही के आकलन में कहा है कि नवंबर 2008 के हमलों के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने इस आशंका से कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की कि इससे पाकिस्तान और अस्थिर होगा और क्षेत्रीय जेहादियों को भारत पर ध्यान केंद्रित करने मौका मिलेगा।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि "हमले के समय की अनिश्चितता होने के बावजूद भारत एक अन्य बड़े आतंकवादी हमले का निशाना बन सकता है। इससे भारतीय उपमहाद्वीप में सीमा पार तनाव फिर बढ़ जाएगा।"
भारत की ओर से संयम की संभावना नहीं
स्ट्रेटफोर ने कहा कि उसे भारत में जारी चुनावों के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं करनी लेकिन यदि भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिली और कमान संभालने का मौका मिला तो एक अन्य हमला होने की सूरत में भारत की ओर से संयम की संभावना नहीं होगी।
आर्थिक मदद के जरिए पाकिस्तान से सहयोग पाने की जो कोशिश अमेरिका की ओर से की जा रही है उसका निकट भविष्य में कोई भी असर पाकिस्तान पर नहीं पड़ेगा। क्योंकि उसे घरेलू स्तर पर एक अलग तरह के तालिबानी आतंकवाद से निपटना पड़ रहा है और वह सीमा पर कार्रवाई की जगह बातचीत को प्राथमिकता देना चाहता है।
आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका और पाकिस्तान की नीति में अंतर हाल के हफ्तों और महीनों में अधिक उजागर हुआ है। कंपनी का यह भी कहना है कि तालिबान से लड़ने में पाकिस्तान की ओर की जा रही उपेक्षा की वजह से तालिबानी आतंकवादी अमेरिकी और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को जाने वाली आपूर्ति पर हमला करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे।
आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में ज्यादा प्रगति नहीं होने से भारत की चिंता बढ़ेगी। गौरतलब है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर हुए आतंकवादी हमलों में लगभग 175 लोगों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका को इराक में कार्रवाई समाप्त करनी होगी ताकि वह अपने संसाधन अफगानिस्तान में जारी युद्ध में लगा सके लेकिन मध्यपूर्व से दक्षिण एशिया आने की नीति ज्यादा आसान नहीं होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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