कसाब अपने बयान से पलटा (राउंडअप)
इस बीच कसाब ने खुद के नाबालिग होने का दावा करते हुए मामले की सुनवाई किशोर न्यायालय में किए जाने की मांग की। चूंकि कसाब अपनी उम्र छुपाते हुए झूठ बोल रहा था इसीलिए विशेष न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही उसके आवेदन को खारिज कर दिया।
विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानी के समक्ष मुकदमे की सुनवाई शुरू करते हुए कहा कि साजिश के तहत मुंबई और अन्य महानगरों में आतंकी हमलों को अंजाम देकर भारत सरकार को अस्थिर करना था जिससे वे जम्मू एवं कश्मीर पर कब्जा कर सकें जो कि उनका असल उद्देश्य था।
प्रतिदिन आधार पर चलने वाली पहले दिन की सुनवाई के बाद निकम ने संवाददाताओं से कहा, "कसाब ने यह स्वीकार किया है कि उसे और उसके नौ अन्य सहयोगियों को पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों ने हथियार एवं गोला-बारूद चलाने का प्रशिक्षण दिया।"
निकम ने कहा, "जब कसाब ने निशानेबाजी में महारत हासिल कर ली तो मेजर जनरल ने उसका पीठ थपथपाकर शाबाशी दी थी।"
कसाब ने इस बात का भी खुलासा किया कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया था होटल ताज महल पैलेस एंड टावर होटल और होटल ट्राइडेंट-ओबेराय में विशेष रूप से विदेशियों को निशाना बनाना है।
निकम ने कहा, "उन्हें अमेरिका, इजरायल, जर्मनी, ब्रिटेन और उन देशों के नागरिकों की हत्या करने का निर्देश दिया गया था जिनसे भारत के संबंध बेहतर हैं। "
उधर एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत कसाब अपने बयान से पलट गया और उसने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उससे दबाव डालकर बयान लिया।
कसाब की ओर से जिरह के लिए सरकार द्वारा नियुक्त वकील एस.जे.अब्बास काजमी ने मामले की पहले दिन की सुनवाई के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, "आज सुबह जब कसाब के बयान का सीलबंद दस्तावेज खोलकर उसे दिखाया गया तो उसने कहा कि यह बयान उसने पुलिस के दबाव में दिया था। उसने अपनी मर्जी से यह बयान नहीं दिया।"
कसाब के बयान के दस्तावेज पर उसके हस्ताक्षर भी है। वकील के मुताबिक कसाब ने कहा कि उसे अपनी मर्जी से बयान देने का मौका नहीं दिया गया। पुलिस ने उस पर दबाव डालकर मनमाफिक बयान हासिल किया है।
काजमी ने कहा, "ऐसी सूरत में मैंने अदालत में एक अर्जी दी है जिसमें कसाब के बयान से पलटने की पुष्टि की गई है। अदालत से कहा गया है कि वह इसे कसाब की स्वीकारोक्ति नहीं माने।"
अब्बास काजमी ने कसाब से संक्षिप्त बातचीत के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम़ एल. ताहिलयानी को सूचित किया कि उनका मुवक्किल 17 वर्ष का है और उम्र के लिहाज से वह वयस्क नहीं, बल्कि किशोर है। काजमी ने कहा, "मैं अदालत से अपील करता हूं कि इस मामले को किशोर अदालत में स्थानांतरित किया जाए।"
काजमी ने विशेष अदालत से कहा कि उसका मुवक्किल निरक्षर है और जिस वक्त मुंबई हमला हुआ उस वक्त वह 18 वर्ष का नहीं था।
इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने कहा कि यह अभियुक्त तीन बार अपनी अलग-अलग उम्र बता चुका है। उसने अपनी उम्र कभी 19 वर्ष बताई तो कभी 21 वर्ष। वह वयस्क है और उस पर इसी अदालत में मामला चलना चाहिए। उन्होंने अदालत को बताया कि कसाब ने अपनी जन्मतिथि 13 सितंबर, 1987 बताई थी और इसका जिक्र आरोप पत्र में भी किया गया है।
निकम ने संवाददाताओं से कहा कि चूंकि कसाब अपनी उम्र छुपाते हुए झूठ बोल रहा था इसीलिए विशेष न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही उसके आवेदन को खारिज कर दिया।
कसाब 26-29 नवंबर को हुए मुंबई आतंकवादी हमलों का मुख्य आरोपी है। इन हमलों में 170 लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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