शन्नो की मौत के मामले में पुलिस ने अब तक मामला दर्ज नहीं किया (लीड-2)
शन्नो (11 वर्ष) नरेला इलाके में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थी। बुधवार को उसकी कक्षा अध्यापिका मंजू ने दंड स्वरूप उसे एक घंटे से भी ज्यादा समय तक धूप में खड़ा कर दिया था जिसके कारण शन्नो बेहोश होकर कोमा में चली गई थी।
शन्नो को राजधानी के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया।
दिल्ली की महापौर आरती मेहरा ने कहा, "अध्यापिका और स्कूल के प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया। अब अध्यापिका की सेवा समाप्त कर दी जाएंगी। मैंने इस मामले जांच के आदेश दिए हैं।"
पुलिस उपायुक्त (बाहरी दिल्ली) अतुल कटियार ने आईएएनएस को बताया, "हमने इस संबंध में अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है। हम चिकित्सा रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"
शन्नो के पिता मोहम्मद अयूब खान ने बताया, "पुलिस ने अब तक शिकायत नहीं दर्ज की है। एमसीडी ने आरोपी अध्यापिका को निलंबित कर दिया है लेकिन इससे हमारी बच्ची वापस नहीं आ जाएगी।"
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) के अध्यक्ष आमोद कंठ ने आईएएनएस से कहा, "यह चौंकाने वाली बात है कि एक छात्रा को इस तरह की दंडित किया गया कि उसकी मौत हो गई। हम स्कूल और इस मामले से संबधित सभी लोगों से स्पष्टीकरण मांगेंगे और एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहेंगे।"
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सदस्य संध्या बजाज ने कहा, "इस समय हम चिकित्सा रिपोर्ट और एमसीडी की जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके बाद हम कार्रवाई करेंगे। यह बेहद निंदनीय घटना है।"
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने इस घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, "हमने इस मामले को संज्ञान में लिया है और जांच के लिए एक दल भेजा है। "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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