शरिया के फैसलों को चुनौती नहीं

समाचार पत्र 'द न्यूज' ने कट्टरपंथी सूफी मोहम्मद के हवाले से लिखा है, "प्रांत के मलकंद डिवीजन की न्यायिक व्यवस्था देश के दूसरे भागों से भिन्न होगी। यहां सभी मामलों का हल शरिया कानूनों के मुताबिक काजी की अदालत में किया जाएगा।"
दारूल कजा यानी एक अपीलीय अदालत की स्थापना की जानी है, ताकि लोग शरिया के फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय न जाएं।
सूफी मोहम्मद की तंजीम निफाज शरिया-ए-मुहम्मदी और प्रांत की सरकार ने 16 फरवरी को एक विवादित शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत स्वात और प्रांत के छह अन्य क्षेत्रों में शरिया कानून लागू करने की बात कही गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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