राजपक्षे ने लिट्टे के गढ़ रहे किलिनोच्ची का दौरा किया (लीड-3)
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खात्मे का संकल्प ले चुके राष्ट्रपति राजपक्षे ने इस इलाके का अचानक दौरा किया। राजपक्षे ने सैनिकों के साथ बातचीत की और लिट्टे के खिलाफ उनकी लगातार जीत का स्वागत किया।
सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्कारा ने आईएएनएस को बताया, "राष्ट्रपति ने किलिनोच्ची का दौरा किया और सैनिकों को संबोधित किया। उनके साथ रक्षा सचिव, सेना के कमांडर और कई अधिकारी भी थे।"
लिट्टे पिछले एक दशक से किलिनोच्ची को अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक राजधानी के रूप में इस्तेमाल करता रहा।
सरकारी सेना ने जनवरी के आरंभ में किलिनोच्ची पर कब्जा करके उत्तरी क्षेत्र पर लिट्टे के एक दशक पुराने कब्जे को समाप्त कर दिया था।
वर्ष 1950 के शुरुआती दशक में पहले प्रधानमंत्री डी.एस.सेनानायके ने इस इलाके दौरा किया था। उसके बाद इस इलाके का दौरा करने वाले राजपक्षे पहले नेता हैं।
रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है, "राष्ट्रपति ने सिंहला और हिंदू नव वर्ष के मौके पर सैनिकों से, आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से तथा अन्य नागरिकों से मुलाकात करने के लिए किलिनोच्ची का दौरा किया।"
सरकारी टेलीविजन के अनुसार हेलीकाप्टर से किलिनोच्ची पहुंचे राजपक्षे ने सैन्य कमांडरों से युद्ध की प्रगति की जानकारी ली।
रिपोर्ट के अनुसार सैन्य कमांडरों ने राष्ट्रपति को बताया कि सैनिक मुलैतिवु जिले के एक छोटे से हिस्से में लिट्टे द्वारा बंधक बनाए गए नागरिकों को मुक्त कराने के लिए दृढ़संकल्पित हैं।
राजपक्षे ने सैनिकों की उपलब्धि की सराहना की और फंसे हजारों नागरिकों को बगैर कोई नुकसान पहुंचाए उन्हें मुक्त कराने के लिए आगे का कदम उठाने के निर्देश दिए।
राजपक्षे ने किलिनोच्ची में स्थित लिट्टे के पूर्व शांति सचिवालय और राजनीतिक मुख्यालय का भी दौरा किया।
राजपक्षे ने अपने सचिव ललित वीरातुंगे, रक्षा सचिव गोटाभाया राजपक्षे और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ लिट्टे द्वारा नष्ट की गईं सार्वजनिक संपत्तियों का मुआयना किया।
संप्रभु तमिल राष्ट्र के प्रतीक के रूप में लिट्टे ने किलिनोच्ची में अलग बैंक और न्यायपालिका की स्थापना की थी।
वर्ष 2002 में नार्वे की मध्यस्थता से हुए शांति समझौते के बाद इसी कस्बे में लिट्टे नेता और राजनयिकों की मुलाकातें हुई थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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