सर्वोच्च न्यायालय ने वरुण गांधी को 2 सप्ताह की रिहाई दी (लीड-1)

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प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति पी.सथशिवम और न्यायमूर्ति जे.एम.पांचाल की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि चुनाव प्रचार अभियान के दौरान वरुण सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने वाले उत्तेजक भाषण न दें।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) को चुनौती देने वाली वरुण की याचिका पर अंतिम फैसला अभी लंबित है।

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के विरोध के बावजूद वरुण की अस्थाई रूप से रिहाई का आदेश दिया।

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर वरुण ने एटा जिला प्रशासन को एक शपथ पत्र देकर कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान वह उत्तेजक भाषण नहीं देंगे। वरुण इसी प्रकार का शपथ पत्र सोमवार तक सर्वोच्च न्यायालय में पेश करेंगे।

न्यायालय ने उनको 50,000 रुपये की निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदार भी पेश करने को कहा।

न्यायालय ने उन्हें पीलीभीत जिला मजिस्ट्रेट को अपने ठिकानों की जानकारी भी देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने वरुण की याचिका पर सुनवाई एक मई तक के लिए स्थगित कर दी।

जेल से बाहर निकलते समय वरुण ने घंटों से बाहर खड़े अपने समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। वरुण मीडिया से बात न कर पाएं, इसलिए जिला प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए थे। उनको जेल के अंदर से ही गाड़ी में लाया गया।

जैसे ही वरुण की गाड़ी आगे बढ़ी उनके समर्थकों की करीब पचास गाड़ियां उनके पीछे चलने लगीं। थोड़ी ही दूर चलने पर जिला प्रशासन ने उन गाड़ियों को रोक दिया।

एटा के जिलाधिकारी गौरव दयाल ने कहा कि पीलीभीत जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।

वरुण गांधी के साथ उनकी मां मेनका गांधी भी थीं, जो आज ही एटा पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि एटा से वरुण और मेनका सड़क के रास्ते आगरा के लिए रवाना हुए और आगरा से वे चार्टर्ड विमान से नई दिल्ली पहुंचेंगे।

पहले वरुण के काफिले को सड़क मार्ग से एटा से बरेली जाना था लेकिन कहा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था के मद्देनजर जिला प्रशासन ने उन्हें बरेली से जाने की इजाजत नहीं दी। हालांकि जिलाधिकारी गौरव दयाल ने साफ किया कि एटा से आगरा होकर दिल्ली जाने का फैसला वरुण ने स्वयं अपनी मर्जी से लिया।

उल्लेखनीय है कि भड़काऊ भाषण मामले में वरुण ने गत 28 मार्च को पीलीभीत जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया था। बाद में उन्हें पीलीभीत जेल से एटा जेल स्थानांतरित कर दिया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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