कई जिलों को प्राप्त होगा एक से अधिक सांसदों का प्रतिनिधित्व

मध्य प्रदेश में परिसीमन से लोकसभा क्षेत्रों की संख्या में बदलाव नहीं आया है। पहले भी 29 संसदीय क्षेत्र थे और अब भी उतने ही हैं। तीन संसदीय क्षेत्रों झाबुआ, शाजापुर और सिवनी का अस्तित्व खत्म हो गया है और देवास, रतलाम व टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र वजूद में आ गए हैं।

परिसीमन से बदले परिदृश्य से एक बात साफ हो जाता है कि प्रदेश के 50 में से 14 ऐसे जिले हैं, जिनके विधानसभा क्षेत्र एक से अधिक संसदीय क्षेत्रों में बंटे हुए हैं। छतरपुर, देवास और रतलाम ऐसे ही जिले हैं। इनके अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र तीन संसदीय क्षेत्रों में स्थान पा गए हैं। इतना ही नहीं शिवपुरी, सागर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, विदिशा, गुना, सीहोर, इंदौर, खंडवा व खरगोन वे जिले है जिनके विधानसभा क्षेत्र दो दो संसदीय क्षेत्रों में बंटे हुए हैं।

परिसीमन से आए बदलाव से प्रदेश के 14 जिलों को अन्य 36 जिलों से इस मामले में अलग कर दिया है कि उनका प्रतिनिधित्व एक से अधिक सांसद करेंगे। छतरपुर जिले को टीकमगढ़, दमोह और खजुराहो के सांसद मिलेंगे, तो देवास के खाते में विदिशा, देवास और खंडवा के सांसद का लाभ प्राप्त होगा। इसी तरह रतलाम को रतलाम, मंदसौर व उज्जैन के सांसदों का प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।

प्रदेश के 50 में से 11 ऐसे जिले हैं, जिन्हें दो-दो सांसद मिलने वाले हैं। शिवपुरी को गुना व ग्वालियर, सागर को सागर व दमोह, कटनी को खजुराहो व शहडोल, सिवनी को सिवनी व बालाघाट, नरसिंहपुर को मंडला व होशंगाबाद, विदिशा को विदिशा व सागर, गुना को गुना व राजगढ़, सीहोर को विदिशा व देवास, इंदौर को इंदौर व धार, खंडवा को खंडवा व बैतूल और खरगोन को खरगोन व खंडवा के सांसदों का प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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