तीन दशकों के न्यूनतम स्तर पर पहुंची मुद्रास्फीति (लीड-2)
केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक गत 28 मार्च से चार अप्रैल के सप्ताह के दौरान थोक मूल्य सूचकांक में 0.4 फीसदी का इजाफा हुआ और यह पिछले सप्ताह के 227.3 (अस्थायी) से बढ़कर 228.2 (अस्थायी) पर पहुंच गया।
सप्ताह के दौरान प्रमुख कमोडिटी समूहों में से विनिर्मित वस्तुओं के सूचकांक में 0.1 फीसदी तथा प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 1.1 फीसदी इजाफा हुआ।
ईंधन, ऊर्जा, बिजली और स्नेहकों के सूचकांक में 0.5 फीसदी का इजाफा हुआ और यह गत सप्ताह के 320.9 (अस्थाई) से बढ़कर 322.6 (अस्थाई) हो गया।
यह इजाफा मुख्यत: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) (12 फीसदी), नाफ्था (आठ फीसदी)और लाइट डीजल (तीन फीसदी)और बिटुमन (दो फीसदी) की कीमतों में तेजी की वजह से हुआ हालांकि फर्नेस ऑयल की कीमत में एक फीसदी की गिरावट आई।
मुद्रास्फीति की दर लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद 14 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में 0.27 फीसदी तक आ पहुंची थी लेकिन 21 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में इसमें फिर बढ़ोतरी हुई और यह 0.31 फीसदी हो गई। उसके बाद से एक बार फिर इसमें लगातार गिरावट आ रही है।
हालांकि मुद्रास्फीति की दर कम होने का तात्पर्य कीमतों में कमी नहीं है बल्कि इससे कीमतों में वृद्धि की दर स्थिर होती है।
अर्थशास्त्री पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में अपस्फीति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अपस्फीति वह स्थिति है जब कीमतों में लगातार गिरावट आने लगती है।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डी.के. जोशी ने आईएएनएस को बताया कि अगर 28 मार्च से चार अप्रैल के बीच थोक मूल्य सूचकांक में इजाफा नहीं होता तो मुद्रास्फीति की दर शून्य तक जा सकती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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