आतंक विरोधी नीति पर अमेरिका और पाक के बीच मतभेद

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इस्लामाबाद, 16 अप्रैल(आईएएनएस)। पाकिस्तान के सीमांत कबायली इलाकों में आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर आतंकवाद की कमर तोड़ने की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीति से पाकिस्तान सरकार के कई नीति-निर्माता सहमत नहीं हैं।

ओबामा द्वारा 27 मार्च को अपनी इस नीति की घोषणा के बाद आतंकविरोधी अभियान के स्वरूप को लेकर दोनों मुल्कों के बीच मतभेद गहरा गया है। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि रिचर्ड होलब्रुक के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में खुलेआम यह कह चुके हैं कि दोनों देशों के बीच 'परस्पर विश्वास' की कमी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी भी अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के प्रमुख जॉन केरी के साथ अपनी बैठक में ऐसी राय प्रकट कर चुके हैं। पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित इलाकों में अमेरिका की ओर से हो रहे ड्रोन हमलों को रोके जाने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिकी इसे आतंकवादियों के खिलाफ कारगर हथियार मान रहा है।

रक्षा विश्लेषक जनरल(सेवानिवृत्त) तलत मूसद कहते हैं, "पाकिस्तान अमेरिका के आक्रामक रवैये पर चाहे जितना नाराजगी जताए, अमेरिका की नीति बदल नहीं रही है। दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा रहा है।"

पाकिस्तान की यह शिकायत भी है कि ओबामा प्रशासन के कुछ अधिकारी उसे बदनाम करने के लिए मीडिया अभियान चला रहे हैं। उसे चिंता है कि इससे भारत के पाक विरोधी अभियान को ऊर्जा मिल रही है। वैसे, होलब्रुक सफाई दे चुके हैं कि अमेरिका में पाकिस्तान के खिलाफ कोई मीडिया अभियान नहीं चल रहा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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