मलेशिया के सर्वोच्च न्यायालय ने हिंद्राफ नेताओं की याचिका खारिज की
कुआलालंपुर, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। मलेशिया के संघीय न्यायालय ने गुरुवार को हिंदू राइट एक्शन फोर्स (हिंद्राफ) के दो नेताओं की याचिका खारिज कर दी। हिंद्राफ नेताओं ने याचिका में कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अपनी कैद की कार्रवाई संबंधी प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत की थी।
इन दो में आर.केंगाधरन भी शामिल हैं, जिनको प्रधानमंत्री नजीब तुन रजाक के कार्यभार संभालने के दिन 12 अन्य कैदियों के साथ रिहा किया गया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका उनके रिहा होने से पहले ही दायर की गई थी।
एक अन्य नेता एम.मनोहरन हैं, जो सांसद और हिंद्राफ के कानूनी सलाहकार हैं। वह हिंद्राफ के दो अन्य नेताओं वसंत कुमार और पी.उदयकुमार के साथ अभी जेल में हैं।
शिक्षा और रोजगार में करीब 20 लाख भारतीय मूल के लोगों के साथ भेदभाव के विरोध में नवंबर 2007 में कुआलालंपुर में विरोध प्रदर्शन के बाद से ही हिंद्राफ ने कई न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल की हैं।
समाचार पत्र 'स्टार ऑनलाइन' के अनुसार प्रधानमंत्री रजाक ने बुधवार को मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मलेशियाई नागरिकों को नस्लीय कैद से बाहर निकलने की आवश्यकता जताई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications