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पूर्व रियासतों के वारिस सेवक बनने की राह पर

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लखनऊ, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। देश में राजे-रजवाड़ों के खात्मे के बावजूद राजघरानों के वारिसों में जनता के सेवक के नाम पर 'शासक' बनने की ललक अब भी बरकरार है। राजनीतिक रूप से सबसे ताकतवर राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार के लोकसभा चुनाव में करीब 10 राजघरानों के वारिस चुनावी मैदान में हैं।

कभी अपने पांव तले जनता को रखने वाली इन रियासतों के वारिस अब जनता का दिल जीतने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में सुबह शाम चक्कर काट रहे हैं।

अमेठी के रामनगर के शाही घराने से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजय सिंह अपने पिता राजा रणंजय सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं, जो पहली बार प्रदेश विधानसभा के लिए 1952 में चुने गए थे। संजय वर्ष ने 1998 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था। केंद्रीय मंत्री रह चुके संजय कांग्रेस में चले गए और फिलहाल सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।

इस कड़ी में पडरौना रियासत के आरपीएन सिंह भी शुमार हैं जो इस लोकसभा चुनाव में पहली बार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। पडरौना से ही कांग्रेस विधायक आरपीएन सिंह कुशीनगर संसदीय क्षेत्र से पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने एक और पूर्व राजकुमारी रत्ना सिंह को एक बार फिर प्रतापगढ़ संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया है जो जिले की कालाकांकर रियासत की वंशज हैं। उनके पिता दिनेश सिंह जिन्हें इंदिरा गांधी का करीबी माना जाता था, वह भी यहां सांसद रह चुके थे।

रत्ना सिंह प्रतापगढ़ सीट से वर्ष 1996 और फिर 1999 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गई। वर्ष 2004 में जिले के अन्य शाही परिवार के अक्षय प्रताप सिंह से चुनाव हार गईं। अक्षय समाजवादी पार्टी (सपा) के मौजूदा विधायक एवं भदरी रियासत के वंशज रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के चचेरे भाई हैं। अक्षय को भी सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

मथुरा से कांग्रेस के मौजूदा सांसद मानवेंद्र सिंह भी राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। राजस्थान की डुंगरपुर रियासत के वारिस मानवेंद्र वर्ष 1984, 1989 और 2004 के चुनाव जीतने के बाद चौथी बार फिर जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

चुनावी जंग लड़ रहे पूर्व रियासतों के वारिसों की सूची में एक और नाम शुमार है बलरामपुर जिले की मनकापुर रिसायत के कीर्तिवर्धन सिंह का। कीर्ति सपा के टिकट पर गोंडा संसदीय सीट से 1998, 2004 के चुनाव जीत चुके हैं। इस बार हालांकि वह सपा छोड़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) बसपा के टिकट पर अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

अयोध्या रियासत के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद फैजाबाद सीट से बसपा के उम्मीदवार हैं। इसी तरह भाजपा ने बाह रियासत के राजा महेंद्र अरिदमन सिंह को फतेहपुर सीकरी संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। वह इससे पहले बाह से वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं लेकिन वर्ष 2007 में वह चुनाव हार गए थे। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने आगरा के मौजूदा सांसद राज बब्बर को खड़ा किया है।

इस चुनावी समर में रामनगर का नवाब घराना भी पीछे नहीं है। बेगम नूर बानो एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरी हैं। इससे पहले वह 1996 और 1999 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुकी हैं लेकिन पिछला चुनाव वह सपा की जयाप्रदा से हार गई थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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