तालेबान ने प्रेमी युगल की हत्या की

सोमवार को देश के दक्षिण पश्चिम प्रांत नीमरोज़ की एक मस्जिद के सामने 21 वर्षीय पुरुष और 19 वर्षीया महिला को गोली मार दी गई.
नीमरोज़ ऐसा क्षेत्र है जहाँ तालेबान का अच्छा ख़ासा दबदबा है.
प्रांत के राज्यपाल ग़ुलाम दस्तग़ीर आज़ाद ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा कि इस्लाम की बेइज़्ज़ती की बात कहते हुए स्थानीय धार्मिक नेता ने फ़तवा जारी किया और उसकी वजह से हत्या हुई.
आज़ाद ने कहा, "एक अविवाहित युवक और एक अविवाहित युवती एक दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे लेकिन उनके परिवार इस शादी के लिए तैयार नहीं थे इसलिए वे भाग निकले."
अधिकारियों का कहना है कि जब वे ईरान जाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें तालेबानी चरमपंथियों ने ढूँढ़ निकाला. उन्हें जबरन ख़ाश रॉड ज़िले में अपने गाँव वापस आने को मजबूर किया गया.
ख़तरनाक स्थान
आज़ाद ने कहा, "तीन तालेबानी मुल्ला उन्हें स्थानीय मस्जिद लेकर आए और एक फ़तवा जारी किया कि उन्हें मार दिया जाना चाहिए. इसके बाद मस्जिद के सामने सार्वजनिक रूप से गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई."
तीन तालिबानी मुल्ला उन्हें स्थानीय मस्जिद लेकर आए और एक फ़तवा जारी किया कि उन्हें मार दिया जाना चाहिए. इसके बाद मस्जिद के सामने सार्वजनिक रूप से गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई ग़ुलाम दस्तग़ीर आज़ाद
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उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ रिपोर्ट मिली हैं कि प्रेमी जोड़े के परिवारों के तालेबान के साथ संबंध हो सकते हैं. इस मुद्दे पर तालेबान से बात नहीं हो सकी.
जानकारों का कहना है कि यह हत्या दूरस्थ और ऐसी ख़तरनाक जगह पर हुई जहाँ तक सरकार की भी पहुँच नहीं है.
तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान में 1996 से लेकर 2001 तक शासन किया है और इस बीच उन्होंने वहाँ इस्लामी शरिया क़ानून लागू किया.
इस क़ानून के अनुसार अविवाहित पुरुष और महिलाओं के मिलने जुलने पर पाबंदी होती है और महिलाओं को किसी पुरुष संबंधी के साथ के बिना घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं होती. इसके अलावा लड़कियों के स्कूल जाने को भी प्रोत्साहित नहीं किया जाता.
तब से अफ़ग़ानिस्तान में न्यायिक व्यवस्था के अलावा स्थानीय पंचायतों या धार्मिक नेताओं के फ़तवे पर बड़ी संख्या में हत्याएँ की जाती हैं. ख़ासतौर पर ऐसे कट्टरपंथी परिवारों में जहाँ लड़कियाँ उनकी मर्ज़ी के मुताबिक शादी करने से इंकार करें.
पिछले तीन सालों में क्षेत्र में तालेबान का दबदबा बढ़ता जा रहा है और अब देश के अनेक ऐसे दूरस्थ प्रांत उनके प्रभाव में आ गए हैं जहाँ अमरीकी नेतृत्त्व वाली सेनाएँ स्थाई रूप से मौजूद नहीं हैं.


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