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'हवा में उड़ जाएगा तीसरा मोर्चा'

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'हवा में उड़ जाएगा तीसरा मोर्चा'

चुनाव प्रचार में जनसंपर्क पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे रघुवंश प्रसाद सिंह इस बात से इनकार करते हैं कि बिहार में लोकसभा चुनाव-2009 सिर्फ़ विकास के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है. उनका मानना है कि चुनाव में जातीय समीकरण अहम भूमिका अदा करेंगे.

पेश है मुज़फ़्फ़रपुर में उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश....

इस बार बिहार में यूपीए पूरी तरह बिखरा हुआ है. कांग्रेस ने आपकी सीट पर भी उम्मीदवार उतार दिया है. कितना असर पड़ेगा चुनावों में?

यूपीए बिखरा ज़रूर है लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला. बिहार में स्थिति अलग है. कांग्रेस के पास वोटर कहाँ है जो हमारे लोकजनशक्ति पार्टी और राजद के गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगा सके. पूरा जनमानस हमारे साथ है और ये मैं हर दिन अपने क्षेत्र में महसूस कर रहा हूँ.

तीसरे मोर्चे को आप किस तरह देखते हैं. ख़ास कर मायावती तो बिहार में भी सक्रिय हो गई हैं. क्या आपको लगता है कि अब लालू यादव की दलितों के मसीहा वाली छवि अब नहीं रही, दूसरे नेता सामने आ रहे हैं?

तीसरा मोर्चा तो तिनका है, हवा में उड़ जाएगा. जहाँ तक मायावती की बात है तो वो दबे कुचले वर्गों की नेता हैं लेकिन अब वो दम नहीं है उनमें. शुरु-शुरु में तो उन्होंने अच्छा काम किया लेकिन इस बार उनकी नेतृत्व क्षमता की परीक्षा होगी. सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं बची उत्तर प्रदेश में. जनता अब उनको सबक सिखाएगी. लालू जी सिर्फ़ दलितों-मुसलमानों के नेता नहीं हैं, उन्हें सबका समर्थन मिल रहा है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि वो विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने केंद्र में शामिल बिहार के मंत्रियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने प्रदेश के लिए कुछ नहीं किया?

नीतीश जनता को छल रहे है. ये छलावा नहीं चलेगा. चालाकी और ट्रिक से जनता को आप मूर्ख़ नहीं बना सकते. उनके पास पैसा कहाँ से आया जो वो विकास की बात करते हैं. हम लोगों ने मिल कर प्रयास किया और उसी का नतीजा है कि यूपीए सरकार ने 16 हज़ार करोड़ रूपए बिहार सरकार को दिए. उसी पैसे से रोड बनवाकर वो अपनी वाहवाही लूट रहे हैं. कल ही एक मुखिया से बात हो रही थी, कह रहा था एक-एक गाँव में सौ-सौ इंदिरा आवास बन रहे हैं. ये कैसे हो रहा है. नीतीश जी की क्या भूमिका है इसमें? कुछ नहीं. जनता सब समझती है. दूसरे की मेहनत पर मलाई लूटने की कोशिश है ये.

तो आप भी विकास को ही मुद्दा बना रहे हैं. क्या जातीय समीकरण गौण हो गया है?

नहीं मैं इससे सहमत नहीं हूँ. अगर जातीय समीकरण की कोई भूमिका नहीं होती तो मेरे क्षेत्र में सारे वोट मुझे ही मिलते. ऐसा नहीं है. समाजशास्त्रीय अध्ययन का विषय है, आप कुछ भी कर लें जातीय समीकरण निर्णायक साबित हो सकता है.

केंद्रीय रोज़गार गारंटी योजना को यूपीए सरकार अपनी मुख्य उपलब्धियों में शुमार करती है और आप इसके नायक माने जाते हैं लेकिन आपके ही लोकसभा क्षेत्र में ये योजना ठीक से लागू होती नहीं दिख रही?

ये राज्य सरकार की विफलता है. अधिकारियों ने सर्वें ठीक से नहीं कराया, जॉब कार्ड बनवाने में धांधली हुई. लोगों को इसका फ़ायदा नहीं मिला. ये तो नीतीश जी से पूछना चाहिए कि उन्होंने इतनी अच्छी योजना का फ़ायदा क्यों नहीं उठाया. इसके लिए केंद्र सरकार किसी रुप में ज़िम्मेदार नहीं है. दूसरे राज्यों में देखिए ये कितना सफ़ल रहा.

ये विडंबना ही है कि मुझे अपने ही क्षेत्र में इस योजना का ये हाल देखने को मिल रहा है.

आपकी टक्कर इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के नेता मुन्ना शुक्ला से है जो पिछली बार आपके ख़िलाफ़ निर्दलीय लड़े थे लेकिन दूसरे नंबर पर रहे. इस बार उन्हें जदयू ने टिकट दिया है. क्या मुक़ाबला दिलचस्प होगा? परिसीमन का असर भी है क्या?

देखिए, परिसीमन के कारण लालगंज विधानसभा क्षेत्र वैशाली से अलग हो गया लेकिन मुज़फ़्फ़रपुर का मीनापुर विधानसभा क्षेत्र उसमें शामिल हो गया. वहाँ के लोग तो काफ़ी ख़ुश हैं. मुझे रिपोर्ट मिल रही है कि वो हमारे समर्थन में हैं. जहाँ तक मेरे विरोधी का सवाल है तो वो धनबल, बाहुबल का सहारा ले रहे हैं और जातीय गोलबंदी की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मुझे नहीं लगता सफ़ल होंगे.

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