'पाक मंशा और प्रतिबद्धता पर सवाल'

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का मुंबई हमलों के बारे और जानकारी मांगना उसकी दोषियों को सज़ा दिलाने की 'मंशा और प्रतिबद्धता पर सवाल' खड़े करता है.
भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "पाकिस्तान को कार्रवाई करने और दोषियों को सज़ा दिलाने के बारे में अपनी प्रतिबद्धता को साबित करना होगा. जितने सबूत माँगे गए थे, कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत दे दिए गए हैं. टाल-मटोल करने और तकनीकी मुद्दे उठाने से पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान लगता है."
सोमवार को मुंबई हमलों के मामले में पाकिस्तान ने भारत से और अधिक जानकारी मांगी थी और कहा था कि उपलब्ध कराई गई जानकारियाँ जाँच आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
आनंद शर्मा का कहना था कि पाकिस्तान का मारे गए आतंकवादी निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे और कर्नल एसके पुरोहित के बयान माँगने का कोई मतलब नहीं है.
पाकिस्तान को कार्रवाई करने और दोषियों को सज़ा दिलाने के बारे में अपनी प्रतिबद्धता को साबित करना होगा. जितने सबूत माँगे गए थे, कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत दे दिए गए हैं. टाल-मटोल करने और तकनीकी मुद्दे उठाने से पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान लगता है विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा
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उनका कहना था, "मुंबई हमलों और इन बयानों का कोई संबंध नहीं है. ये ध्यान पलटने की रणनीति है. अभी प्राथमिकता मुंबई के दोषियों को सज़ा दिलाना है."
'डीएनए रिपोर्ट'
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने इन हमलों में पाकिस्तानी नागरिकों के शामिल होने की पुष्टि की थी और उसके बाद भारत से 30 सवालों के जवाब मांगे थे और भारत ने इनके जवाब पाकिस्तान को दिए थे.
पाकिस्तान सरकार के रक्षा मामलों के सलाहकार रहमान मलिक ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत ने मुंबई हमलों में शामिल चरमपंथियों के सिम कार्ड और जीपीएस के बारे में जो जानकारी दी है वो पर्याप्त नहीं हैं.
इतना ही नहीं पाकिस्तान का यह भी कहना था कि कसाब का डीएनए और मृतक चरमपंथी इस्माइल की भेजी गई डीएनए रिपोर्ट एक ही है तो क्या वे जुड़वाँ भाई थे या कुछ और बात है.
मलिक का कहना था कि पाकिस्तान कसाब के ख़िलाफ़ दायर चार्जशीट की पूरी कॉपी चाहते हैं और ये भी जानना चाहते हैं कि क्या इन हमलों में कोई भारतीय भी संलिप्त था या नहीं.


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