31 गांवों के लोग किसी को नहीं देंगे वोट
छिंदवाड़ा के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में हिवरखेडी, मडवाढाना, देवरंधा, बिलवा, जम्होडीपंडा, मोहगांव, खेरी लड्डू, ककई, महेन्द्रवाडा, केवलारी, मोवार, देवरीकला, कलकोटी, काराघाट, नेर, जमुनियां, नगझिर, राजाखोह सहित 31 गांव के प्रतिनिधि पहुंचे और उन्होंने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग तो करेंगे मगर किसी भी राजनीतिक दल और उसके उम्मीदवार को वोट नहीं देंगे।
ये गांव वाले फार्म 17 (ए) का इस्तेमाल करेंगे। इतना ही नहीं 23 अप्रैल तक किसी नेता को भी अपने गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे। यह भारतीय संसदीय व्यवस्था में पहला अवसर है जब सामूहिक तौर पर फार्म 17 (ए) का इस्तेमाल किए जाने का निर्णय लिया गया हो।
प्रदेश के छिंदवाड़ा क्षेत्र में पेंच नदी पर माचागोरा बांध बनाने की कवायद लगभग दो दशक से जारी है। इस बांध के बनने से कई गांव के डूब में आने की आशंका है। इस इलाके के ग्रामीणों का पुराना अनुभव अच्छा नहीं रहा है और उन्हें आशंका है कि जमीन तो जाएगी ही और उनके हाथ मुआवजा नहीं आएगा।
परियोजना से प्रभावित होने वाले गांव की समस्या पर चर्चा के लिए जन संगठनों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी शरद चंद्र बेहार, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि किशोर समरीते, सुनीलम और मनमोहन शाह भट्टी की मौजूदगी में चुनाव पर एक नजर कार्यक्रम का आयोजन किया।
माचागोरा बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव के लोग पूर्व में चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुके हैं और उन्होंने इसके लिए जगह-जगह बैनर तथा पोस्टर भी लगा रखे हैं। इनमें साफ तौर पर कहा गया है कि उनके गांव में राजनेताओं का प्रवेश निषेध है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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