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पहले चरण के प्रचार के अंतिम दिन भी सोनिया-राहुल के निशाने पर रहे आडवाणी (राउंडअप)

By Staff
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को आड़े हाथों लिया तो उधर आडवाणी ने दलितों के मसीहा बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर के बहाने कांग्रेस पर दलितों को नजरअंदाज करने का आरोप मढ़ा।

इस बीच मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने माना कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच गठबंधन होने के चलते यहां वाम मोर्चे की राह उतनी आसान नहीं रही जितना के पिछले चुनावों में रहा करती थी।

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला में सोनिया ने एक रैली में कहा कि आतंकवाद से निपटने में सिर्फ कांग्रेस ही सक्षम है। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग हैं जो आतंकवादियों को मेहमान की तरह कंधार छोड़ने जाते है तो दूसरी तरफ कांग्रेस है जिसने आतंकवाद का मुकाबला करते हुए कई कुर्बानियां दी है।

सोनिया ने कहा कि भाजपा आतंकवाद जैसी गतिविधियों को भी राजनैतिक चश्मे से देखती है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्हें मजबूत नेता बताया जा रहा है उनके ही कार्यकाल में तीन-तीन खूंखार आतंकवादियों को अफगाानिस्तान ले जाकर छोड़ा गया था और उसी में से एक ने संसद भवन पर हमले की साजिश को अंजाम दिया था। वर्ष 1999 में हुए विमान अपहरण कांड मामले में तत्कालीन गृह मंत्री आडवाणी ने क्यों नहीं अपने पद से इस्तीफा दिया।

राहुल ने उधर पंजाब में आडवाणी पर हमला बोला और कंधार विमान अपहरण कांड का जिक्र करते हुए कहा कि या तो आडवाणी सच नहीं बोल रहे या फिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उन पर यकीन नहीं था।

राहुल ने कहा, "आडवाणी जी कहते हैं कि कंधार मामले में आतंकवादियों को मुक्त करने के फैसले के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। इस देश का युवा यह जानना चाहता है कि इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनको जानकारी क्यों नहीं थी। इसमें दो ही बातें हो सकती हैं कि या तो वाजपेयी जी को उन पर यकीन नहीं था या फिर आडवाणी सच नहीं बता रहे हैं।"

उधर, अंबेडकर दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित एक रैली में आडवाणी ने कहा, "कांग्रेस ने अंबेडकर के साथ न्याय नहीं किया। उन्हें लोकसभा भेजा जा सकता था लेकिन षड्यंत्र के तहत उन्हें हरा दिया गया।"

उन्होंने कहा, "उन्हें सन 1990 में भारत रत्न की उपाधि दी गई जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं थी। वह हमारे सहयोग से बनी विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी जिसने उन्हें यह सम्मान दिया। इससे कांग्रेस पार्टी की महान दलित नेता के प्रति भावना का पता चलता है।"

इन सबके बीच कोलकाता में प्रकाश करात ने स्वीकार किया है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गठबंधन से वाम मोर्चे को कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य की अधिकांश सीटों पर वाम मोर्चे का ही परचम लहराएगा।

कोलकाता प्रेस क्लब में 'प्रेस से मिलिए' कार्यक्रम में करात ने कहा, "पार्टी का अनुमान है कि इस लोकसभा चुनाव में हमारा मुकाबला बेहद कड़ा है। इसका एक प्रमुख कारण कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का गठबंधन होना है।"

उन्होंने कहा कि पूर्व में जब भी विरोधी दल एकजुट हुए हैं, माकपा नेतृत्व वाले वाम मोर्चे की अपने विरोधियों से कड़ी टक्कर हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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