शोभराज ने अपने प्रमुख वकील को हटाया
काठमांडू, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। हत्या के मामले में मिली उम्रकैद की सजा से मुक्ति पाने के नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़ रहे चार्ल्स शोभराज ने अपने प्रमुख वकील पर अपनी रिहाई की संभावनाओं को आघात पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उसे हटा दिया है।
नेपाल के शीर्ष वकीलों में से एक बसंत भंडारी काठमांडू के एक जुआघर में छह वर्ष पहले गिरफ्तार किए गए शोभराज का तभी से बचाव कर रहे थे। सोमवार को एक पत्र भेजकर शोभराज ने हितों के टकराव के कारण उन्हें मुकदमे से हटने को कहा।
शोभराज ने भंडारी के स्थान पर एक अन्य वरिष्ठ वकील रामप्रसाद श्रेष्ठ को नियुक्त किया है।
श्रेष्ठ विवादास्पद रायमाझी आयोग के सदस्य थे, जिसका गठन वर्ष 2006 में सेना समर्थित राजा ज्ञानेंद्र के शासनकाल के दौरान लोकतंत्र पर हमला करने वालों को सजा देने लिए हुआ था। परंतु आज तक एक भी व्यक्ति को सजा नहीं दी जा सकी।
अपने वकील के माध्यम से आईएएनएस को भेजे संदेश में शोभराज ने कहा कि वह भंडारी के बचाव के तरीके से हतप्रभ है।
"सबसे पहले तो उन्होंने न्यायाधीशों को अक्षम बताकर उन्हें हटाने का प्रयास किया और उसके बाद इस कल्पना का उपयोग किया कि हो सकता है कि मैं 1975 में नेपाल आया हूं जबकि मैं इससे हमेशा इंकार करता आया हूं।"
मामले में नया मोड़ गुरुवार को तब आया जब न्यायालय में एक डच नागरिक के फर्जी पासपोर्ट की सहायता से वर्ष 1975 में शोभराज के नेपाल आने से संबंधित मुद्दे पर सरकार और उसके वकील की बहस हो रही थी।
भंडारी ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि उनका मुवक्किल 1975 में फर्जी पासपोर्ट के सहारे नेपाल में आया तो भी उस पर फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करने का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि 70 के दशक के आव्रजन कानून समाप्त किए जा चुके हैं।
शोभराज ने आरोप लगाया कि भंडारी पैसे को लेकर हुए विवाद के बाद से शत्रुतापूर्ण रुख अपनाए हुए थे। उनको संदेह था कि नई वकील शकुंतला थापा को अधिक धन दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि शकुंतला शोभराज की 20 वर्षीय मंगेतर निहिता विश्वास की मां हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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