• search

आनंददायक अनुभूति वाली तंत्रिकाएँ

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi
आनंददायक अनुभूति वाली तंत्रिकाएँ

वैज्ञानिकों के एक दल ने त्वचा में मौजूद ऐसे स्नायुओं का पता लगाया है जो विशेष रूप से आनंददायक अनुभूतियों को हमारे मस्तिष्क तक पहुँचाते हैं.

इसमें यूनीलिवर कंपनी के वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

आनंददायक अनुभूति को जागृत करने के लिए आदमी के शरीर को एक सेकेंड में चार-पाँच सेंटीमीटर की विशेष गति से स्पर्श करना होता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि मानवीय संबंधों में किस तरह स्पर्श महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

पिछले कई वर्षों से वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश करते रहे हैं कि किस तरह शरीर को दर्द की अनुभूति होती है और कौन सी तंत्रिकाएँ इन अनुभूतियों को हमारे मस्तिष्क तक लेकर जाती हैं.

इस जानकारी के अभाव में लोगों को काफ़ी तक़लीफ़ उठानी पड़ती है.

न्यूरोपैथी जिसमें मस्तिष्क की कोशिएँ नष्ट हो जाती हैं, उसमें ये बेहद तकलीफ़देह हो सकती है.

इसमें कई बार मस्तिष्क तक अनुभूतियों को पहुँचाने वाले तंत्र में ख़राबी आ जाती है और ऐसे में लोगों को तब भी दर्द की अनुभूति होती है जब कोई कारण नहीं होता.

अनुभूतियों की परख

हालांकि इस शोध में वैज्ञानिकों ने दर्द के विपरीत आनंद से संबंधित अनुभूतियों को परखा है.

जिस गति से लोगों के हाथों को सलहाने पर आनंद की अनुभूति हुई वह उस गति के बराबर थी जिस गति से माँ बच्चों को थपकी देती है और दंपत्ति एक–दूसरे को प्यार की अभिव्यक्ति के समय सहलाते हैं फ़्रांसिस मैकग्लोन, शोधकर्ता

जिस गति से लोगों के हाथों को सलहाने पर आनंद की अनुभूति हुई वह उस गति के बराबर थी जिस गति से माँ बच्चों को थपकी देती है और दंपत्ति एक–दूसरे को प्यार की अभिव्यक्ति के समय सहलाते हैं

स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय और नार्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने स्पर्श के बाद 20 लोगों में होने वाली प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया.

बाद में उन्होंने विभिन्न गति से इन लोगों के अग्रहाथ की त्वचा को सहलाते हुए जाँच की.

जब लोगों को किसी स्पर्श के बाद आनंद की अनुभूति हुई तब वैज्ञानिकों ने पाया कि 'सी- टेक्टाइल' स्नायु के तंतुओं को सहलाया गया था.

एक विशेष गति से ज्यादा या कम गति पर जब स्पर्श किया गया तो लोगों को आनंद की अनुभूति नहीं हुई और न ही स्नायु तंत्र जागृत हुआ.

इस शोध से जुड़े प्रोफ़ेसर फ़्रांसिस मैकग्लोन ने कहा, " जिस गति से लोगों के हाथों को सहलाने पर आनंद की अनुभूति हुई, वह उस गति के बराबर थी जिस गति से माँ बच्चों को थपकी देती है और दंपत्ति एक–दूसरों को प्यार की अभिव्यक्ति के समय सहलाते हैं."

वैज्ञानिकों ने पाया है कि 'सी- टेक्टाइल' तंत्रिकाएं उस त्वचा पर ही होते हैं जहाँ बाल मौजूद होते हैं और ये हथेली की त्वचा पर नहीं मौजूद होते.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more