स्वात में शांति की राह में रोड़ा है तोरा बोरा के आतंकी
स्वात घाटी में शरिया कानून लागू किए जाने की मांग पूरी किए जाने के वादे के आधार पर हुए समझौते में मध्यस्थता करने वाले मौलाना सूफी मोहम्मद ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पर समझौते के प्रति संजीदा नहीं होने का आरोप लगाकर अपना शांति शिविर बंद कर दिया है। इसे समझौते के लिए बुरा संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, एक ओर जहां जरदारी पर समझौते को खारिज करने का पश्चिमी दबाव है तो दूसरी ओर अलकायदा से गहरे ताल्लुक रखने वाले तालिबानियों का एक गुट इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। वह स्वात में शांति की हिमायत नहीं कर रहा। यह गुट तोरा बोरा इलाके से अपनी गतिविधियां चलाता है। इस गुट पर सूफी मोहम्मद का कोई प्रभाव नहीं है।
मुख्य कट्टरपंथी कमांडर इब्न आमीन और शेष छह कमांडर यहां से अलकायदा की गतिविधयां चलाते हैं। वे वैश्विक जेहाद में विश्वास रखते हैं। डीपीए से बात करते हुए एक विशेशज्ञ कहते हैं, "तोरा बोरा शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है।" आमीन स्वात के पेउचर इलाके में आतंकी शिविर चलाता रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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